ईरान पर हमले के खिलाफ थे अमेरिकी उपराष्ट्रपति, ट्रंप बोले- वेंस दार्शनिक रूप से थे थोड़े अलग

Iran War Disagreement: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ईरान पर हमले के खिलाफ थे, लेकिन ट्रंप ने उनकी राय नजरअंदाज की। अब अमेरिका ईरान के साथ एक लंबे और अंतहीन युद्ध में घिर गया है जिससे संकट गहरा गया है।
Trump-Vance Rift VP Opposed Iran Strike Citing Philosophical Differences and War Risks 
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (सोर्स-सोशल मीडिया)
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JD Vance Opposed Iran Strike: ईरान और अमेरिका के बीच छिड़ी इस विनाशकारी जंग के पीछे व्हाइट हाउस के अंदर की एक बड़ी अनसुनी कहानी सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार किया है कि उनके उपराष्ट्रपति जेडी वेंस शुरुआत से ही इस सैन्य हमले के सख्त खिलाफ थे। वेंस को इस बात का डर था कि एक छोटा सा हमला अमेरिका को कभी न खत्म होने वाले दलदल में धकेल देगा। आज जब पूरी दुनिया तेल संकट और युद्ध की मार झेल रही है, तो वेंस की वो आशंकाएं सच साबित होती दिख रही हैं।

वेंस का निजी विरोध

ईरान पर हमला करने से पहले ही उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने निजी तौर पर राष्ट्रपति ट्रंप के सामने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उनका मानना था कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं है और इसके परिणाम बहुत ही भयानक और अनियंत्रित हो सकते हैं। मगर ट्रंप ने युद्ध का मन बना लिया था और उन्होंने वेंस की इन दार्शनिक चेतावनियों को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया।

दार्शनिक रूप से अलग सोच

ट्रंप ने खुद जेडी वेंस को एक 'संशयवादी' बताया है जो युद्ध की सफलता को लेकर शुरू से ही काफी चिंतित और डरे हुए थे। राष्ट्रपति के अनुसार वेंस दार्शनिक रूप से थोड़े अलग थे और इस सैन्य अभियान को लेकर उनमें कोई खास उत्साह नहीं था। हालांकि प्रशासन का कहना है कि एक बार फैसला हो जाने के बाद वेंस ने पूरी तरह से ट्रंप की बात का समर्थन किया।

हमले और खामेनेई की मौत

यह पूरी सैन्य कार्रवाई 28 फरवरी को शुरू हुई थी जब इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर पहला बड़ा हमला किया। इस भीषण हमले में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई जिसने पूरे खाड़ी क्षेत्र में आग लगा दी। इसके बाद से ही ईरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी और अब इस विनाशकारी युद्ध को पूरे 14 दिन बीत चुके हैं।

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वैश्विक संकट की आहट

ईरान ने जवाब में पूरे मिडिल-ईस्ट में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकानों को अपना निशाना बनाया है और स्थिति को गंभीर कर दिया है। सबसे बड़ी चुनौती होर्मुज जलडमरूमध्य में पैदा हुई है जहां ईरान ने तेल टैंकरों की आवाजाही को पूरी तरह से रोक दिया है। इस कदम से पूरी दुनिया में कच्चे तेल का भारी संकट खड़ा हो गया है और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है।

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