
नितिन गडकरी और देवेंद्र फडणवीस (सौजन्य-सोशल मीडिया)
NMC Corporators: भाजपा को बहुमत मिलने के बाद नगरसेवकों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। महापौर कौन बनेगा? यह सवाल सबकी जुबां पर है और इसके साथ ही नगरसेवकों को यह भी उम्मीदें हैं कि उन्हें अन्य महत्वपूर्ण समितियों में स्थान मिले। हालांकि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मन में क्या चल रहा है, यह किसी को नहीं पता।
27 जनवरी को दोनों नेता नागपुर में होंगे और उस दिन महापौर पद के संदर्भ में स्थिति साफ हो जाएगी। नगरसेवक इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं क्योंकि उन्हें भी समितियों में पद की आवश्यकता है। 22 जनवरी को मुंबई में महापौर पद के आरक्षण पर निर्णय लिया गया और उसके बाद ही नागपुर में महापौर पद को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
कई नाम सामने आए और उनके पक्ष और नेताओं के साथ रिश्तों, पार्टी संगठन और संघ से उनके संबंधों पर चर्चा की गई। इस कारण भाजपा के नेताओं और संघ के कई कार्यकर्ताओं ने इस मुद्दे पर नाराजगी भी जताई। यह स्पष्ट है कि बहुमत भाजपा की है तो महापौर भी भाजपा का ही होगा, फिर भी महापौर पद के लिए हो रही सार्वजनिक चर्चा पार्टी में अंतर्विरोध और विवाद को जन्म दे रही है।
सूत्रों का कहना है कि महापौर पद के लिए योग्य उम्मीदवार का चयन पार्टी द्वारा किया जाएगा। वहीं महापौर पद पर होने वाली चर्चाओं को रोकने के लिए भी कुछ नेताओं ने निर्देश दिए हैं।
महापौर पद के अलावा स्थायी समिति के सभापति, परिवहन समिति और सत्ता पक्ष नेता जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी आगामी मंगलवार को निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनका विचार संसदीय समिति और कोर कमेटी द्वारा किया जाएगा। इन नामों पर विचार कर केंद्रीय मंत्री गडकरी और मुख्यमंत्री फडणवीस के समक्ष रखा जाएगा। उसके बाद ही पदों पर चयन प्रक्रिया पूरी होगी।
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मुख्यमंत्री फडणवीस नागपुर शहर के प्रमुख नेता हैं और इनका नेतृत्व न केवल शहर में, बल्कि पूरे देश में मशहूर है। ऐसे में महापौर पद पर एक ऐसे व्यक्ति का चयन किया जाएगा, जो शहर के विकास को दिशा दे सके और राष्ट्रीय पहचान बना सके। पिछले एक दशक में शहर का जितना विकास हुआ है, उसमें महापौर का भी अहम योगदान रहा है। भाजपा नेतृत्व इस बात पर जोर देगा कि महापौर पद पर बैठने वाले व्यक्ति की राष्ट्रीय पहचान हो और वह नेतृत्व की प्रतिष्ठा को आगे बढ़ाए।
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महापौर पद के लिए आरक्षण सर्वसाधारण महिला वर्ग के लिए होने के कारण कई नगरसेविकाएं इस पद के लिए पात्र मानी जा रही हैं। ऐसे में जातीय समीकरण का भी ध्यान रखा जाएगा। हालांकि पार्टी ओबीसी के विवादों से दूर रहना चाहती है, लेकिन फिर भी जातीय समीकरण को संतुलित रखना एक बड़ी चुनौती होगी।
2017 में भाजपा के 108 नगरसेवक चुनकर आए थे। उस वक्त पहले नंदा जिचकार और बाद में प्रवीण दटके महापौर बने लेकिन अगले ढाई साल में संदीप जोशी और दयाशंकर तिवारी प्रत्येक को सवा साल का कार्यकाल मिला। इस बार भी 102 नगरसेवक चुनकर आए हैं। इसलिए यह चर्चा है कि महापौर पद पर 4 लोगों को सवा साल का कार्यकाल मिल सकता है।






