वोटर लिस्ट का ‘खेल’: नितिन गडकरी का परिवार भी नहीं बचा, नागपुर में हजारों लोगों के नाम सूची से गायब!
Voter List Errors Nagpur: नागपुर में मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी से 5% घटा मतदान। नितिन गडकरी का परिवार भी प्रभावित, एक ही घर के सदस्यों के सेंटर अलग-अलग वार्डों में।
- Written By: प्रिया जैस
वोटर लिस्ट में गड़बड़ी (सौजन्य-सोशल मीडिया, कंसेप्ट फोटो)
Nagpur Elections: नागपुर महानगर पालिका (मनपा) चुनाव 2026 के लिए गुरुवार को हुआ मतदान प्रशासन की बड़ी लापरवाही की भेंट चढ़ता नजर आया। शहर की मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर विसंगतियां पाई गईं, जिसके कारण हजारों नागरिकों को बिना मतदान किए ही केंद्रों से निराश होकर लौटना पड़ा। आलम यह था कि केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जैसे दिग्गज नेता के परिवार के संदर्भ में भी सूची की खामियां चर्चा का विषय बनी रहीं।
एक ही घर पर अलग-अलग पोलिंग बूथ
मतदाता सूची में सबसे बड़ी गड़बड़ी परिवारों के बिखराव को लेकर दिखी। एक ही घर में रहने वाले सदस्यों के नाम अलग-अलग वार्डों या कई किलोमीटर दूर स्थित मतदान केंद्रों पर भेज दिए गए। कई परिवारों में पति का नाम एक बूथ पर था, तो पत्नी का दूसरे और बच्चों का तीसरे केंद्र पर। घंटों कतार में लगने के बाद जब मतदाताओं को पता चला कि उनका नाम उस केंद्र पर नहीं है, तो कई लोगों ने दूसरे केंद्र पर जाने के बजाय घर लौटना ही बेहतर समझा।
नागपुर के निवासियों को बताया ‘बाहरी’
हैरानी की बात यह रही कि दशकों से नागपुर में रह रहे पुराने निवासियों के नाम सूची से या तो गायब थे, या उन्हें ‘बाहरी’ के रूप में चिह्नित कर दिया गया था। मतदाता अपने स्मार्टफ़ोन और हेल्प डेस्क पर घंटों अपना नाम खोजते रहे, लेकिन ‘नो रिकॉर्ड फाउंड’ के मैसेज ने उनके उत्साह पर पानी फेर दिया।
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मतदान प्रतिशत पर सीधा असर
विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची की इन खामियों का सीधा असर वोटिंग प्रतिशत पर पड़ा। नागपुर में इस बार लगभग 55-56 प्रतिशत मतदान होने का अनुमान है। जानकारों का कहना है कि यदि मतदाता सूची पारदर्शी और त्रुटिहीन होती, तो यह आंकड़ा 60 प्रतिशत के पार जा सकता था।
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प्रशासन की इस सुस्ती के कारण कम से कम 5 प्रतिशत मतदान का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। यह लोकतंत्र का मजाक है। जब हम मतदान के लिए उत्साहित हैं, तो प्रशासन हमें केंद्रों के चक्कर कटवा रहा है। अगर मतदाता सूची ही सही नहीं है, तो जागरूक नागरिक क्या कर सकता है।
प्रशासनिक तंत्र पर उठते सवाल
चुनाव आयोग द्वारा ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘स्मार्ट इलेक्शन’ के बड़े-बड़े दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। नागपुर जैसे बड़े शहर में जहां चुनाव आयोग के पास पर्याप्त समय और संसाधन थे, सूची में ऐसी बुनियादी गलतियां होना तंत्र की विफलता को दर्शाती हैं। कल होने वाली मतगणना में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन ‘लापता’ वोटों का असर किस राजनीतिक दल के समीकरण को बिगाड़ता है।
