नागपुर न्यूज
Government Land Scam: अब तक तो भूमाफिया आम नागरिकों की जमीनें हड़पकर करोड़ों रुपयों की हेराफेरी कर रहे थे लेकिन पूर्व नागपुर में हालात ये हैं कि लैंड माफिया सरकारी जमीन ही बेचने में जुटे हैं। करोड़ों रुपयों की जमीन पर भूमाफिया ने अपना लेआउट बनाकर लोगों को प्लॉट बेच दिए। अब सरकारी जमीन का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है।
आश्चर्य की बात ये है कि इस संबंध में नागपुर सुधार प्रन्यास (एनआईटी) और पुलिस से शिकायत की जा चुकी है लेकिन कोई एक्शन नहीं हुआ। जिस तरह पश्चिम नागपुर में दिलीप ग्वालबंशी ने अपना गिरोह स्थापित किया उसी तरह संजय कारोंडे नामक भूमाफिया पूर्व नागपुर में सक्रिय है। नागरिक उसके खिलाफ थाने में शिकायत करते हैं लेकिन कोई एक्शन नहीं होता।
यही कारण है कि अब कारोंडे पैर पसारता जा रहा है और सरकारी जमीन भी हड़पने लगा है। देवचंद कारेमोरे ने बताया कि इस काम में एनआईटी के कर्मचारी भी कारोंडे का साथ दे रहे हैं। अब यह गैंग सत्ताधारी पार्टी के पदाधिकारियों को साथ लेकर काम कर रही है।
कारेमोरे ने बताया कि कलमना के मौजा चिखली देवस्थान में नागपुर बेघर नागरी समिति का खसरा क्र. 105 और 106 में लेआउट है। बिल्कुल इससे लगकर खसरा क्र. 104 की जमीन एनआईटी की मालिकी की है। कारोंडे ने अपने लेआउट के साथ एनआईटी की जमीन को भी कब्जे में ले लिया जिसकी वर्तमान में कीमत 25 करोड़ से ज्यादा है।
शासकीय जमीन बेचने की अनुमति उसे नहीं है। इसके बावजूद कारोंडे ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए यह जमीन अपनी बताकर सरकारी कर्मचारियों के साथ साठगांठ की। कारोंडे और उसके साथियों ने जमीन पर लेआउट बना लिया।
अब सरकारी जमीन किसी संस्था के नाम पर नहीं बिक सकती लेकिन दस्तावेजों की हेराफेरी करके कारोंडे ने यह जमीन लोगों को बेच दी है। यह केवल सरकार के साथ ही नहीं प्लॉटधारकों के साथ भी धोखाधड़ी है। लोग खून-पसीना एक करके पाई-पाई जोड़कर जमीन खरीदते हैं। ऐसे भूमाफिया लोगों के साथ फ्रॉड कर रहे हैं।
कारेमोरे ने बताया कि संजय कारोंडे ने इसी तरह कई प्लॉट्स पर कब्जा किया है। चर्चित गैंगस्टर रणजीत सफेलकर के साथ भी उसने एक जमीन पर कब्जा किया था। वर्ष 2021 में सिटी पुलिस ने सफेलकर पर नकेल कसी थी। अप्रैल 2021 में रवि डिकोंडवार की शिकायत पर पुलिस ने सफेलकर के साथ कारोंडे और अन्य के खिलाफ प्लॉट हड़पने का मामला भी दर्ज किया था।
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अब कारोंडे ने कलमना के ही कुछ राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं को साथ रखा है। उपरोक्त सरकारी जमीन में उन्हें भी प्लॉट दिए हैं जहां फिलहाल गोदाम बने हुए हैं। हाल ही में इस गिरोह ने एक व्यक्ति के साथ मारपीट की थी। कनपटी पर पिस्तौल भी लगाई लेकिन थाने में मामला दबा दिया गया।
कारोंडे ने केवल एनआईटी ही नहीं, पुलिस थाने के अधिकारी और कर्मचारियों पर भी दबाव बनाया है। पहले यह गैंग प्लॉट के फर्जी दस्तावेज बनाकर कब्जा कर लेती है। पीड़ित व्यक्ति के थाने पहुंचते ही गिरोह को खबर लग जाती है। थाने पहुंचकर राजनीतिक पार्टी के लोग उस व्यक्ति पर दबाव बनाते हैं। बाद में उस व्यक्ति को ‘औने-पौने’ दाम में जमीन छोड़ने के लिए धमकाया जाता है।
अब तक दर्जनभर शिकायतें की जा चुकी हैं लेकिन कलमना थाने में कोई कार्रवाई नहीं होती। आश्चर्य की बात ये है कि खुद एनआईटी अपनी जमीन की सुरक्षा नहीं कर पा रही है। शिकायत करने के बावजूद एनआईटी अपना प्लॉट वापस लेने के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रही। इससे साफ है कि पूरा प्रशासन भूमाफिया के दबाव में है।