नागपुर बनेगा पब्लिक हेल्थ का हब: IIPH स्थापना को मंजूरी, स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा नया बल
Nagpur IIPH Institute: नागपुर में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ की स्थापना को मंजूरी मिली है। इससे स्वास्थ्य सेवाओं, प्रशिक्षण और अनुसंधान को मजबूती मिलेगी।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर पब्लिक हेल्थ ( सोर्स: सोशल मीडिया )
Healthcare Development Maharashtra: नागपुर राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए सरकार ने ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ (आईआईपीएच) नामक स्वतंत्र संस्था की स्थापना को मंजूरी दे दी है।
यह संस्था दिल्ली स्थित पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के सहयोग से नागपुर में स्थापित की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी शासन निर्णय के अनुसार बदलती सार्वजनिक स्वास्थ्य जरूरतों को ध्यान में रखते हुए विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि तथा सभी स्तरों पर नियमित प्रशिक्षण की आवश्यकता है।
इसके साथ ही बीमारियों के रोकथाम, मृत्यु दर और बीमारियों में कमी लाने के लिए प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना भी जरूरी है। सरकार का मानना है कि एक समर्पित सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था राज्य में शिक्षा, अनुसंध्धान, योजना, निगरानी और मूल्यांकन जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग प्रदान करेगी। इससे स्वास्थ्य विभाग के मानव संसाधन को सशक्त बनाने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलेगी।
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मिहान-खापरी में बनेगा संस्थान यह सल्यान नागपुर के मिहान-खापरी क्षेत्र में 51 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने 120 करोड़ रुपये की पूंजीगत निधि और 50 करोड़ रुपये की संचित निधि मजूर की है।
कंपनी अधिनियम के तहत स्थापित होने वाली इस संस्था में राज्य सरकार, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की भागीदारी रहेगी।
मानव संसाधन विकास, कौशल वृद्धि पर फोकस
राज्य स्तरीय समर्पित सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था के रूप में यह संस्थान विभाग के कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि, कौशल विकास और नए प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर काम करेगा, इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
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हालांकि इस पहल का स्वागत किया जा रहा है, लेकिन इसके वित्तीय प्रबंधन को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि केंद्र सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 के अनुसार राज्यों को अपने कुल बजट का 8 प्रतिशत स्वास्थ्य पर खर्च करना चाहिए, जबकि महाराष्ट्र वर्तमान में लगभग 4 प्रतिशत ही खर्च कर रहा है। इस हालत में नई संस्था के लिए अलग से अतिरिक्त निधि उपलब्ध कराना होगा।
