ग्रामीण अस्पताल (AI generated Image)
Doctor Shortage Vidarbha: ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए अब भी सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग महत्वपूर्ण माना जाता है। जनता के लिए जिला अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उनकी प्रमुख जरूरतों में शामिल हैं लेकिन पिछले वर्षों से रिक्त पदों का बैकलॉग बढ़ता ही जा रहा है। नियमित पद होने के बावजूद अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों की भर्ती में देरी का खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।
विभाग में वर्ग-1 और वर्ग-2 के 46 फीसदी से ज्यादा पद खाली हैं। वहीं वर्ग-3 के 24 फीसदी और वर्ग-4 के 23 फीसदी पद खाली हैं। ग्रामीण स्वास्थ्य के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग रीढ़ मानी जाती है। यही वजह है कि हर जिले में जिला अस्पताल, उपजिला अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र कार्यरत हैं।
इसका मुख्य उद्देश्य जनता को बेहतर स्वास्थ्य मिल सके, लेकिन अब भी अस्पतालों में सुविधाओं का अभाव तो है ही, साथ ही मैनपॉवर की भी कमी बनी हुई है। यही वजह है कि जब भी कोई मरीज गंभीर हो तो उसे शहरी भाग के मेडिकल कॉलेजों सहित प्राइवेट अस्पतालों में जाने की सलाह दी जाती है। हाल ही में काटोल के पास हुए भयावह विस्फोट की घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।
नागपुर विभाग के अंतर्गत नागपुर, भंडारा, गड़चिरोली, वर्धा, गोंदिया, चंद्रपुर का समावेश है। इन जिलों में 28 नवंबर 2025 तक वर्ग-1, वैद्यकीय अधिकारी गट-अ, वैद्यकीय अधिकारी गट-ब के कुल 2044 मंजूर पदों में से 1181 पद ही भरे हुए हैं जबकि 865 पद खाली हैं। यानी करीब 46 फीसदी से ज्यादा पद खाली हैं।
इसी तरह वर्ग-3 के कुल 823 पदों में से 24 फीसदी पद खाली हैं। इनमें नर्स के 1866 पदों में से 411 पद खाली हैं। लिपिक के 637 में से 140 पद, टेक्नीशियन के 716 पदों में से 160 पद खाली हैं। सबसे ज्यादा दिक्कतें वर्ग-4 के पदों को लेकर हो रही है। कुल 2108 पदों में 483 पद खाली हैं।
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इनमें नागपुर जिले में मंजूर 558 पदों में से 144 पद खाली हैं। इसी तरह भंडारा में 355 पदों में से 89 पद खाली, गड़चिरोली में 292 पदों में से 75 पद खाली, वर्धा में 263 पदों में से 58 पद, गोंदिया में 305 पदों में से 51 पद, चंद्रपुर में 335 पदों में 66 पद खाली हैं।
| श्रेणी / वर्ग | मंजूर पद | भरे हुए पद | रिक्त पद | रिक्तता (%) |
| अ और ब (Class 1 & 2) | 2044 | 1181 | 865 | ~46% |
| तृतीय श्रेणी (Class 3) | 3449 | 2623 | 823 | ~24% |
| चतुर्थ श्रेणी (Class 4) | 2108 | 1655 | 483 | ~23% |
हाल ही में सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग द्वारा योजनाओं के स्ट्रक्चर में बदलाव किया गया है। इसके अंतर्गत सरकारी योजनाओं के तहत बीमारियों की संख्या बढ़ाकर 2,399 कर दी गई है। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को भी शामिल किया जा रहा है। इससे अधिकाधिक मरीजों को लाभ मिलेगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 25 तरह की बीमारियों का पैकेज निर्धारित किया गया है।
हालांकि योजनाओं का विस्तार तो अच्छी बात है, लेकिन मैनपॉवर के बिना उद्देश्य हासिल करना कैसे संभव होगा। केवल मैनपॉवर की कमी ही नहीं बल्कि साधन-सुविधाओं की भी कमी गंभीर समस्या बनी हुई है। उपकरणों की कमी की वजह से जिला अस्पताल और उप जिला अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों को सीधे सरकारी मेडिकल कॉलेजों में रेफर किया जाता है।