नागपुर में सिविल लाइंस के सिर्फ 3 लॉन वैध, बाकी सब अवैध! कोर्ट की फटकार से अधिकारियों में हड़कंप

Nagpur High Court: अवैध मैरिज लॉन्स पर नागपुर हाई कोर्ट सख्त! बिना परमिशन चल रहे क्लबों और लॉन्स को लेकर अधिकारियों को फटकार। ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए दिए कड़े निर्देश।
Nagpur High Court slams officials over illegal marriage lawns and noise pollution. Only 3 lawns in Civil Lines have permits. Strict 45dB limit enforced.
हाई कोर्ट (फाइल फोटो)
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Nagpur Illegal Marriage Lawns: नागपुर न्यायालय ने बुधवार को सुनवाई के दौरान ध्वनि प्रदूषण और बिना उचित अनुमति के चल रहे लॉन्स एवं क्लबों को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने प्रशासन और संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि इन अवैध लॉन्स पर ध्वनि प्रदूषण के साथ-साथ गत समय आदेश में दिए गए अन्य मुद्दों की परेशानी को रोकने के लिए केवल शिकायतों का इंतजार करने की बजाय निवारक कदम उठाने की आवश्यकता है।

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि सिविल लाइंस क्षेत्र में केवल 3 लॉन के पास ही अनुमति है, जबकि बाकी बिना अनुमति के चल रहे हैं। न्यायालय ने इन लॉन्स की अनुमति और बुनियादी ढांचे को लेकर कड़े सवाल उठाए।

यह पाया गया कि विशेष रूप से विवाह समारोहों के आयोजन के लिए अलग से अनुमति नहीं ली गई है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि व्यावसायिक उपयोग या क्लब हाउस की अनुमति का मतलब विवाह समारोहों की अनुमति नहीं है। इसके लिए अग्नि शमन, स्वच्छता और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े दिशा-निर्देशों का पालन करना अनिवार्य है।

शिकायत का इंतजार नहीं बल्कि रोकथाम पर जोर

प्रशासन ने यह तर्क दिया कि पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत पुलिस से शिकायत मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाती हैं। इस पर उच्च न्यायालय ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि अधिकारियों की भूमिका रोकथाम की होनी चाहिए, न कि केवल शिकायत मिलने के बाद हरकत में आने की। सिविल लाइंस में ध्वनि प्रदूषण को रोकने के लिए चलाया गया एक पायलट प्रोजेक्ट काफी हद तक सफल रहा है और न्यायालय इसे पूरी तरह लागू करवाना चाहता है।

नियमों का सख्ती से हो पालन

न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि ध्वनि सीमा 45 डेसिबल से अधिक नहीं होनी चाहिए। अक्सर प्रशासन का पूरा ध्यान रात 10 बजे के बाद बजने वाले लाउडस्पीकर पर होता है लेकिन न्यायालय ने सवाल किया कि सुबह 6 से रात 10 बजे के बीच होने वाले 100 डेसिबल से अधिक के शोर का क्या?

न्यायालय ने दिन के समय भी ध्वनि प्रदूषण के नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने स्कूलों में बच्चों के बीच जागरूकता फैलाने और ध्वनि प्रदूषण के प्रभावों पर आधारित डॉक्यूमेंट्री दिखाने का सुझाव दिया है। तेज ढोल बजने के कारण एक व्यक्ति के स्वास्थ्य पर पड़े नकारात्मक प्रभाव का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया।

बिना लाउडस्पीकर क्यों नहीं हो सकते कार्यक्रम

न्यायालय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे लाउडस्पीकर और साउंड सिस्टम की अनुमति के लिए एक नया ड्राफ्ट आवेदन प्रारूप तैयार करके अदालत में पेश करें। इस नए प्रारूप में आवेदक को यह लिखित स्पष्टीकरण देना होगा कि उन्हें साउंड सिस्टम की आवश्यकता क्यों है और इसके बिना उनका कार्यक्रम क्यों नहीं हो सकता। न्यायालय ने संबंधित अधिकारियों को तथ्यों को घुमाने के प्रति सख्त चेतावनी दी है और मामले में स्पष्ट व सीधे जवाब मांगे हैं। अधिकारियों को पूरे निर्देशों के साथ अगली सुनवाई में पेश होने के लिए कहा गया है।

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