इंदौर हनीट्रैप केस: रेशू चौधरी और श्वेता जैन ही हैं मास्टरमाइंड, पुलिस ने जांच की तेज; 7 आरोपियों को भेजा जेल

Indore Honeytrap Case Update: हनीट्रैप मामले में पुलिस ने सभी सातों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। आरोपियों के मोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा गया है।
Indore Honeytrap Mastermind Reshu Chaudhary And Shweta Jain
श्वेता जैन और रेशू चौधरी (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Indore Honeytrap Mastermind Reshu Chaudhary And Shweta Jain: मध्य प्रदेश में सामने आए हनी ट्रैप मामले का खुलासा बाहुबली और फायरिंग के आरोपी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत के बाद हुआ। मामले में नेताओं, अधिकारियों और कई रसूखदार लोगों के जुड़े होने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने बेहद गोपनीय तरीके से जांच शुरू की।

पुलिस ने विशेष टीम गठित कर पूरे मामले में चुपचाप कार्रवाई की, जिससे आरोपियों तक बिना किसी सूचना लीक हुए पहुंचा जा सके। शुरुआती जांच में कई अहम जानकारियां सामने आने के बाद मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

रेशू चौधरी का नाम सामने आने के बाद जांच हुई तेज

शुरुआत में इस मामले में लेडी शराब तस्कर अलका दीक्षित, उसका बेटा जयदीप और लाखन चौधरी के नाम सामने आए थे। हालांकि बाद में क्राइम ब्रांच की जांच आगे बढ़ने पर हनी ट्रैप पार्ट-1 की मुख्य आरोपी श्वेता जैन की भूमिका भी सामने आई। जांच में खुलासा हुआ कि श्वेता जैन पूरे नेटवर्क में अहम कड़ी के रूप में सक्रिय थी। वहीं आगे की पड़ताल में सागर निवासी उसकी करीबी सहयोगी रेशू चौधरी का नाम भी प्रमुख रूप से उभरकर सामने आया, जिसके बाद मामले की जांच और तेज कर दी गई।

सभी सातों आरोपियों को भेजा जेल

डीसीपी राजेश कुमार त्रिपाठी ने सोमवार को बताया कि मामले में गिरफ्तार सभी सातों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसियां अब तकनीकी और डिजिटल साक्ष्य जुटाने में लगी हुई हैं। आरोपियों से जब्त किए गए मोबाइल फोन को विस्तृत जांच के लिए फॉरेंसिक लैब भेजा जा रहा है, ताकि डिजिटल डेटा के जरिए मामले से जुड़े अन्य तथ्यों और संभावित कड़ियों का पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और आगे कई अहम खुलासे हो सकते हैं।

पुलिस ने क्या बताया?

डीसीपी राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि रेशू चौधरी और श्वेता जैन इस ब्लैकमेलिंग मामले में मुख्य षड्यंत्रकारी और सलाहकार की भूमिका में सामने आई हैं। इसी आधार पर दोनों को आरोपी बनाया गया है। हालांकि पुलिस ने अब तक किसी भी अन्य व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया है और न ही यह स्पष्ट किया है कि मामले में कितने लोगों को ब्लैकमेल कर करोड़ों रुपए की उगाही की गई। डीसीपी के अनुसार फिलहाल जांच जारी है। शुरुआती तौर पर मामला बिल्डर और कारोबारी चिंटू ठाकुर द्वारा दर्ज कराई गई ब्लैकमेलिंग की शिकायत से जुड़ा हुआ है।

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