

Nagpur Graduates Constituency: बीजेपी हर चुनाव में अपने नये प्रयोग के लिए पहचानी जाती है। इसका लाभ भी अनेक चुनावों में उसे हुआ है लेकिन विधान परिषद की नागपुर संभाग स्नातक चुनाव क्षेत्र सीट पर प्रयोग ने उसे 'अजेय गढ़' से निर्वासित कर दिया था। 62 वर्षों से जनसंघ व भाजपा की लगातार जीत को वर्ष 2020 के चुनाव में कांग्रेस ने छौन लिया था।
दरअसल, 2020 के चुनाव में बीजेपी ने परिवर्तन का प्रयोग करने के चक्कर में अपने सिटिंग विधान परिषद सदस्य अनिल सोले की जगह संदीप जोशी को टिकट दे दिया था। यह परिवर्तन पार्टी पर भारी पड़ गया। कांग्रेस ने अभिजीत वंजारी को मैदान में उतारा था। वंजारी ने जीत हासिल कर बीजेपी का गढ़ कांग्रेस के नाम कर दिया।
जानकारों का कहना है कि स्नातक चुनाव में मतदाता पढ़ा-लिखा व सुलझा होता है। उसे विशेष जाति के उम्मीदवार नहीं बल्कि योग्य उम्मीदवार चाहिए होता है। फिलहाल बीजेपी ने अधिकृत उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है लेकिन मतदाता पंजीयन प्रभारी व पूर्व विधायक सुधाकर कोहले का नाम ऊपर चल रहा है। इस बार भी किसी तरह का खेला नहीं हुआ तो उनका नाम पक्का समझा जा रहा है।
समझा जा रहा है कि बीजेपी इस बार किसी तरह के प्रयोग पर रिस्क नहीं लेना चाहेगी। उसे अपनी खोयी हुई सीट वापस हासिल करनी है। उसने पूर्व विधायक सुधाकर कोहले को इस सीट के लिए मतदाता पंजीयन प्रभारी बनाया। वर्ष 2014 के विस चुनाव में दक्षिण नागपुर सीट से वे चुनाव जीते थे लेकिन 2019 के चुनाव में मोहन मते को टिकट देने के लिए बीजेपी ने अपने सिटिंग एमएलए का ही टिकट काट दिया था।
कोहले को नागपुर ग्रामीण का जिलाध्यक्ष बनाकर भेज दिया गया। 2024 के चुनाव में कोहले ने फिर दक्षिण नागपुर की अपनी पुरानी सीट से दावा किया लेकिन मते को रिपीट किया गया। भीतरखाने की मानें तो उस समय नाराज कोहले को स्वयं सीएम देवेंद्र फडणवीस ने स्नातक चुनाव क्षेत्र सीट के माध्यम से विधान परिषद लाने का वादा किया था। कोहले को मतदाता पंजीयन प्रभारी बनाया गया।
तभी से इस सीट पर उनकी उम्मीदवारी तय मानी जा रही। दावा है कि कोहले ने संभाग में करीब पौने दो लाख मतदाता पंजीयन करवाया है। हालांकि उनकी मेहनत का फल खाने के लिए पार्टी के कुछ लोग उम्मीदवारी का दावा ठोक रहे हैं। अनिल सोले भी दावा कर रहे हैं। वहीं संदीप जोशी सहित कुछ नाम भी चल रहे हैं।
नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है। कांग्रेस और भाजपा के दावेदारों की ओर से अभी से शक्ति प्रदर्शन की जोरदार तैयारी की जा रही है। कांग्रेस की ओर से प्रदेश प्रभारी डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद सहित प्रदेशाध्यक्ष व आलानेताओं के आने की संभावना है।
वहीं कोहले के समर्थकों को विश्वास है कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के साथ ही अन्य मंत्री, सांसद, विधायक और प्रमुख पदाधिकारी नामांकन रैली में शामिल होंगे। इस बार के चुनाव में करीब ढाई लाख मतदाताओं के होने की संभावना है। फिलहाल 2.33 लाख मतदाताओं के पंजीयन का आंकड़ा सामने आया है। अंतिम तीन दिनों में बड़ी संख्या में आवेदन जमा होने के कारण उनकी गणना की जा रही है।
पिछली बार ओबीसी मुद्दा प्रमुख रहा था और इसका चुनाव पर असर भी देखने को मिला था। इस बार भाजपा भी सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है। ऐसे में 'ओबीसी फैक्टर' के पहले जितना प्रभावी रहने की संभावना कम मानी जा रही है। पिछले दो महीनों से देश में 'जेन-जी' को लेकर माहौल बना हुआ है। युवाओं के आंदोलनों में नागपुर भी सक्रिय रहा है।
'जेन-जी' के रुख के बाद राज्य में पहली बार चुनाव होने जा रहा है, ऐसे में युवा मतदाताओं का रुझान किस ओर रहता है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर है। युवक कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता भी सक्रिय हुए। विद्यार्थी आंदोलन को देखते हुए भाजपा ने भी युवा मोर्चा, विद्यार्थी आघाड़ी और एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया है।
(इनपुट: राजशेखर गोपावार)