नागपुर महावितरण की लापरवाही से थमे आपली बस के पहिए, केबल कटने से 40 ई-बसें बंद, 5000 यात्री परेशान

Nagpur Apli Bus News: नागपुर में महावितरण की खुदाई के दौरान मुख्य केबल कटने से वाठोडा डिपो की 40 ई-बसें चार्ज नहीं हो सकीं। बसें ठप होने से दिनभर में 5,000 यात्री प्रभावित हुए।
Nagpur E-Bus Charging Station Wathoda
EV बस (सोर्स: सोशल मीडिया)
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Nagpur E-Bus Charging Station Wathoda: नागपुर महावितरण की भूमिगत बिजली लाइन के लिए की जा रही खुदाई का खामियाजा मनपा की 'आपली बस' सेवा को भुगतना पड़ा। वाठोडा स्थित ई-बस चार्जिंग स्टेशन परिसर में मंगलवार दोपहर खुदाई के दौरान मुख्य बिजली केबल टूट गया।

इसके चलते चार्जिंग स्टेशन की बिजली आपूर्ति बंद हो गई और चार्जिंग के लिए खड़ों 40 इलेट्रिक बसें आगे की फेरियों के लिए रवाना नहीं हो सकीं। अचानक आई इस तकनीकी समस्या से 'आपली बस' का परिवहन नियोजन पूरी तरह प्रभावित हुआ।

कई मार्गों पर बसों की फेरियां प्रभावित होने से यात्रियों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। बस सेवा उपलब्ध नहीं होने के कारण कई यात्रियों ने निजी वाहनों का सहारा लिया। इसका सीधा असर बस सेवा की राइडरशिप पर भी पड़ा और एक दिन में करीब 5,000 यात्रियों की कमी दर्ज की गई।

40 ई-बसों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल सकी

नागपुर महावितरण के वाठोडा चार्जिंग स्टेशन परिसर में नंदग्राम परियोजना के काम के लिए मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे भूमिगत खुदाई शुरू की गई थी।

इसी दौरान चार्जिंग स्टेशन को बिजली आपूर्ति करने वाला मुख्य केबल क्षतिग्रस्त हो गया। केबल टूटते ही चार्जिंग व्यवस्था ठप हो गई। चार्जिंग के लिए स्टेशन पर पहुंचीं 40 ई-बसों को पर्याप्त बिजली नहीं मिल सकी।

परिणामस्वरूप इन बसों को आगे की फेरियों पर भेजना संभव नहीं हुआ। एक साथ बड़ी संख्या में बसें उपलब्ध नहीं होने से परिवहन विभाग के सामने तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने की चुनौती खड़ी हो गई। किंतु बाद में सुधार किए जाने के बाद स्थिति पूर्ववत हो गई।

Nagpur E-Bus Charging Station Wathoda
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210 बसों की चार्जिंग के लिए वैकल्पिक व्यवस्था

वाठोडा डिपो की अन्य करीब 210 बसों की चार्जिंग व्यवस्था बनाए रखने के लिए उन्हें खापरी, लकड़गंज और मोरभवन स्थित चार्जिंग केंद्रों की ओर मोड़ना पड़ा।

वैकल्पिक केंद्र अपेक्षाकृत दूर होने के कारण बसों को वहां पहुंचने और चार्जिंग के बाद वापस सेवा में लगाने में अतिरिक्त समय लगा।

इसका असर बसों के निर्धारित समय पर पड़ा। कई मार्गों पर फेरियां देर से चलीं, जबकि कुछ मागों पर बसों की उपलब्धता कम हो गई। इससे यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में अतिरिक्त समय लगा।

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