700 ग्राम के नवजात ने जीती जिंदगी की जंग, 100 दिनों तक चला इलाज, नागपुर GMC के डॉक्टरों की मेहनत लाई रंग

Nagpur GMC NICU News: नागपुर GMC में 26 सप्ताह में जन्मे 700 ग्राम नवजात का 100 दिन NICU में इलाज कर डॉक्टरों ने बचाई जान, अब 1.88 किलो वजन के साथ घर भेजा।
A 700-gram premature baby born at 26 weeks was successfully treated in Nagpur GMC NICU for 100 days and discharged healthy.
नागपुर जीएमसी के डॉक्टर्स ने बचाई जान (सौजन्य-नवभारत)
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NICU treatment Nagpur: नागपुर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल के बाल रोग विभाग के नवजात अतिदक्षता विभाग ने अत्यंत समय पूर्व जन्मे एक नवजात का सफल उपचार कर उसे नया जीवन दिया है। केवल 26 सप्ताह की गर्भावस्था में मात्र 700 ग्राम वजन के साथ जन्मे इस शिशु का लगातार 100 दिनों तक अतिदक्ष उपचार किया गया।

उपचार के बाद शिशु का वजन बढ़कर 1.88 किलोग्राम हो गया और अब उसे स्वस्थ अवस्था में घर भेजा गया। एनआईसीयू के प्रभारी एवं प्राध्यापक डॉ. आशीष लोथे ने बताया कि जन्म के बाद शिशु को गंभीर श्वसन समस्या थी। इसके लिए तुरंत सर्फेक्टेंट थेरेपी दी गई और शिशु को 11 दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया। इसके बाद 10 दिनों तक सीपीएपी के माध्यम से श्वसन सहायता दी गई।

21 दिनों तक एंटीबायोटिक उपचार

उपचार के दौरान शिशु को सेप्टीसीमिया (रक्त संक्रमण) भी हो गया था। इसके लिए 21 दिनों तक एंटीबायोटिक उपचार दिया गया, साथ ही आंतों की गंभीर समस्या भी उत्पन्न हुई। सहायक प्रा. डॉ. संदीप मानवटकर ने बताया कि कुछ दिनों तक शिशु को भोजन बंद रखा गया और बाद में धीरे-धीरे ओरोगैस्ट्रिक ट्यूब फीडिंग शुरू की गई। इसके बाद शिशु में आंखों की समस्या पाई गई।

समय रहते उपचार देकर शिशु की दृष्टि सुरक्षित रखी गई। बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष तिवारी ने बताया कि शिशु में जन्मजात हृदय रोगों का भी सफलतापूर्वक प्रबंधन किया गया। डॉक्टर टीम की निरंतर देखरेख से शिशु की स्थिति धीरे-धीरे सुधरती गई।

700 ग्राम से शुरू हुई जीवन यात्रा

इस उपचार में रेजिडेंट डॉक्टर डॉ. मरिया शेख, डॉ. शुभांगी नीमा, डॉ. मुग्धा भिवगडे, डॉ. मिथिला, डॉ. लावण्या और डॉ. महेश तथा नर्सिंग स्टाफ आरती अत्राम, सुरेखा, तक्षा, नीलिमा, तृप्ती, जयश्री, स्नेहा और प्रीति ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अधिष्ठाता डॉ. राज गजभिये के मार्गदर्शन में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अविनाश गावंडे के नेतृत्व में ऐसे अत्यंत समय-पूर्व जन्मे शिशुओं के उपचार के लिए आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

केवल 700 ग्राम से शुरू हुई इस शिशु की जीवन यात्रा अब लगभग 2 किलोग्राम वजन तक पहुंच चुकी है। यह सफलता सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की क्षमता और डॉक्टरों व नर्सों की समर्पित सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण है।

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