नागपुर साइबर पुलिस की काली करतूत! सोने का अंडा बने फ्रीज अकाउंट, अनफ्रीज करने के नाम पर वसूली का खेल शुरू
Nagpur Cyber Police Scam: नागपुर में साइबर सेल के कर्मचारी ही बन गए हैं 'ठग'! फ्रीज हुए बैंक खातों को चालू कराने के बदले फौजियों और आम जनता से खुलेआम रिश्वत मांगने के सनसनीखेज खुलासे।
- Written By: आकाश मसने
प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI)
Bank Account Freeze Case: नागपुर में साइबर अपराध के मामले दिनोंदिन बढ़ते जा रहे हैं। आए दिन नागरिक तरह-तरह साइबर ठगी का शिकार हो रहे हैं। ऑनलाइन ठगी करने वालों के अकाउंट फ्रीज किए जाते हैं लेकिन इसके साथ ही मनी ट्रेल की भी जांच होती है। जहां-जहां ऐसे खातों से पैसा ट्रांसफर होता है, उन खातों को भी फ्रीज कर दिया जाता है और यहां से शुरू होती है आम आदमी की मुसीबत। क्योंकि साइबर पुलिस द्वारा होल्ड किए गए खातों पर दोबारा व्यवहार शुरू करने के लिए लोगों को साइबर पुलिस स्टेशन के चक्कर काटने पड़ते हैं।
इस काम के लिए साइबर पुलिस थाने में तैनात कर्मचारी जमकर वसूली कर रहे हैं। इसके कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। बगैर चाय-पानी के साइबर पुलिस थाने में कोई काम नहीं होता। खुलेआम लोगों से पैसा मांगा जाता है। जो पैसा देता है उनका काम फटाफट हो जाता है और जो इनकी नाजायज मांग पूरी नहीं करते उनकी चप्पल घिस जाती है।
फौजी से भी मांगने लगे पैसे
सिक्किम जैसे संवेदनशील भाग में तैनात एक फौजी ने ऑनलाइन गेमिंग में पैसे कमाए। उसके सैलरी अकाउंट में रकम जमा हुई। इसके बाद अचानक उसे जानकारी मिली कि खाता फ्रीज हो चुका है। नागपुर की साइबर पुलिस द्वारा खाता फ्रीज करवाए जाने का पता चला लेकिन छुट्टी नहीं मिलने के कारण वह नागपुर नहीं आ सकता था, इसीलिए 5 महीने तक उसके खाते से कोई व्यवहार नहीं हुआ। खाते में तनख्वाह तो जमा होती थी लेकिन खाता फ्रीज होने के कारण पैसे निकाल नहीं सकता था। किसी तरह वह छुट्टी लेकर नागपुर आया।
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साइबर पुलिस थाने में तैनात भारत नामक कर्मचारी ने उससे खाता अनफ्रीज करवाने के लिए 10,000 रुपये मांगे। जब उसने फौजी होने की जानकारी दी तो पहले कुछ बहाने बताए गए। वह पैसे देने को तैयार नहीं था। आखिर फौज के नाम पर उसका खाता अनफ्रीज किया गया।
पैसे नहीं देने पर गाली देकर भगाया
सीताबर्डी निवासी सुमित जरगर ट्रैवल्स का व्यवसाय करते हैं। बैंक से अपने नाम पर लोन नहीं मिलने पर सुमित ने अपने दोस्त अमोश सोनकेसुरिया से मदद मांगी। अमोश के नाम पर लोन लेकर बस खरीदी जिसकी ईएमआई का पैसा भी वो खुद दे रहे थे। अमोश ने उनकी बस किसी दूसरे व्यक्ति को बिना बताए बेच दी लेकिन सुमित ने उसे 5.80 लाख का ऑनलाइन पेमेंट किया था। इसकी शिकायत देने सुमित सीताबर्डी थाने गए तो ऑनलाइन फ्राड बताकर साइबर पुलिस थाने भेजा गया।
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शिकायत दर्ज की गई अमोश का खाता होल्ड करवा दिया गया। जब सुमित ने अपनी रकम वापस दिलाने के लिए कहा तो विजय नामक कर्मचारी ने पहले 2 लाख रुपये की मांग की। सुमित ने इतने पैसे देने से इनकार कर दिया। इसके बाद बात 50,000 रुपये पर आई। सुमित ने काम करवाने के बाद रकम देने की हामी दी, इसके बावजूद उसे गालियां देकर थाने से भगा दिया गया। सुमित ने बताया कि उसकी तरह और भी लोग अपने खाते अनफ्रीज करवाने के लिए थाने के चक्कर काट रहे हैं। साइबर पुलिस थाने में तैनात कर्मचारी हर किसी से पैसों की मांग करते हैं।
दुकानदार भी परेशान
साइबर फ्रॉड के कारण अब दुकानदार बहुत ज्यादा परेशान हैं। अब अधिकांश लोग कैश का व्यवहार करने की बजाय यूपीआई से पेमेंट करते हैं। ऐसे में फ्रॉड मामला सामने आने पर आरोपी द्वारा जिन-जिन लोगों को पेमेंट किया जाता है सभी खाते फ्रीज हो जाते हैं। ऐसे में 500 से 1000 रुपये का ऑनलाइन पेमेंट लेने वाले दुकानदारों के खाते भी फ्रीज होते हैं। जब लोग थाने जाते हैं तो अनफ्रीज करवाने के लिए मोटी रकम मांगी जाती है। आला अधिकारियों का इस ओर ध्यान नहीं है। कर्मचारी अपने लेवल पर ही सेटिंग करके जमकर मलाई खा रहे हैं।
