नागपुर पुलिस में हड़कंप: 500 रुपये के फ्रॉड केस में करोड़ों की वसूली का खेल, 2 इंस्पेक्टर और 7 कर्मचारी सस्पें
Nagpur Cyber Police Suspension: नागपुर साइबर पुलिस में 500 रुपये की धोखाधड़ी की आड़ में सट्टा किंग एकांश जैन से करोड़ों की वसूली और आपसी मारपीट के बाद कमिश्नर ने 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
- Written By: आकाश मसने
नागपुर पुलिस कमिश्नर रविंद्र कुमार सिंगल (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Cyber Police Officers Suspended: नागपुर में 9 पुलिसकर्मियों के निलंबन से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। नागपुर के साइबर पुलिस थाने में दर्ज हुए 500 रुपये का फ्रॉड केस इतने लोगों की बलि लेगा यह किसी ने सोचा नहीं था। विवादित मामले को लेकर चली आपसी रंजिश में अब साइबर पुलिस थाने के ही 3 अधिकारी सहित 9 कर्मचारियों को निलंबित हो गए है।
नागपुर पुलिस कमिश्नर रविंद्र कुमार सिंगल ने इस मामले को लेकर विभागीय जांच के आदेश दिए थे। जांच में कई अनियमितताएं पाई गईं। इसकी रिपोर्ट मिलते ही सीपी ने साइबर पुलिस स्टेशन नॉर्थ रीजन के इंस्पेक्टर बलीराम सुतार, साउथ रीजन के इंस्पेक्टर योगेश घारे, एपीआई विजय राणे, कांस्टेबल प्रफुल ठाकरे, सतीश वाघ, श्रीकांत गोनेकर, सुशील चंगोले, अजय पवार और सौरभ हिवरकर को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
भले ही प्रशासकीय अनियमितताओं के कारण निलंबन होने की बात कही जा रही हो लेकिन असल में वसूली का टारगेट रखकर ही यह मामला दर्ज किया गया था। अधिकारी-कर्मचारियों ने वसूली का टारगेट तो पूरा कर लिया लेकिन जांच को अधूरा छोड़ दिया।
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क्या है 500 रुपये की धोखाधड़ी का केस?
दरअसल 500 रुपये की धोखाधड़ी का यह केस ऑनलाइन क्रिकेट बेटिंग रैकेट चलाने वाले एकांश जैन नामक व्यक्ति को टारगेट करने के लिए दर्ज किया गया था। पुलिस को सूचना थी कि एकांश करोड़ों का सट्टा और हवाला कारोबार चलाता है और उसे दबोचने के बाद इंटरनेशनल रैकेट बाहर आएगा। इसी लालच में केस दर्ज किया गया लेकिन केस की प्राथमिक जांच भी पूरी नहीं की गई। एफआईआर में कहीं भी एकांश जैन का नाम नहीं था, फिर भी साइबर पुलिस थाने की टीम सीधे पुणे रवाना हुई और एकांश जैन के खरडी स्थित कार्यालय पर छापा मार दिया।
बताया जा रहा है कि एफआईआर साउथ रीजन में हुई थी लेकिन जांच दल में कर्मचारी नॉर्थ रीजन से ले जाए गए। सबसे बड़ी लापरवाही ये थी कि पुणे जाने से पहले अधिकारियों से कोई अनुमति भी नहीं ली गई। गुपचुप टीम रवाना हो गई और वापस भी आ गई।
हिस्सेदारी पर विवाद
पुणे पहुंची टीम ने एकांश से पूछताछ भी की और उसका एक मोबाइल फोन भी जब्त किया लेकिन इसकी कोई आधिकारिक एंट्री थाने में नहीं की गई। 3 कर्मचारियों को जांच के लिए ही मुंबई रवाना कर दिया गया। एकांश जैन पर गाज गिरने का यह पहला मामला नहीं था। वर्ष 2014 में पुणे पुलिस ने उसके खिलाफ ऑनलाइन क्रिकेट बेटिंग का मामला दर्ज किया था। इसके बाद क्रिकेट बेटिंग सॉफ्टवेयर तैयार कर सट्टेबाजी करने का भी मामला दर्ज किया गया था।
वसूली और आपसी रंजिश का पर्दाफाश
एकांश जैन का नेटवर्क पुणे, चेन्नई और दुबई तक फैला हुआ है। खरडी में उसकी सोशल स्टूडियो नामक कंपनी है। कहने को तो यह डिजिटल मार्केटिंग करती है लेकिन असल में काम क्रिकेट सट्टे, डिब्बा कारोबार और हवाला का है। मामला तब विवादों में आया जब पुणे में मौजूद टीम ने एकांश जैन से भारी वसूली की। सूत्रों का दावा तो करोड़ों रुपए का है लेकिन कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है। विवाद तब शुरू हुआ जब टीम नागपुर वापस लौटी। आरोप है कि पुणे गई टीम ने वसूली की रकम आपस में बांट ली, जिससे मुंबई भेजी गई टीम और अन्य कर्मचारी नाराज हो गए।
कांस्टेबल से मारपीट पड़ गई भारी
धीरे-धीरे प्रकरण को लेकर कानाफूसी होने लगी और पूरा मामला मीडिया तक पहुंच गया। इससे जांच से जुड़े अधिकारी परेशान हो गए। वैसे तो सबकी मिलीभगत थी लेकिन जांच अधिकारी राणे को कांस्टेबल प्रफुल ठाकरे पर खबरी होने का संदेह हुआ। राणे ने प्रफुल को कार्यालय में ही थप्पड़ जड़ दिए और मोबाइल छीन लिया। इस बेइज्जती के कारण प्रफुल 2 दिन लापता हो गया और पूरा प्रकरण अधिकारियों की नजर में आया।
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नागपुर पुलिस कमिश्नर रविंद्र कुमार सिंगल के आदेश पर डीसीपी जोन-2 नित्यानंद झा ने सभी के बयान दर्ज किए। सभी की अलग-अलग मुद्दों पर लापरवाही सामने आई। अब जिन 2 अधिकारियों के बीच रंजिश चल रही थी, दोनों ही थाने से बाहर हैं। अब भी कुछ विवादित कर्मचारी थाने में छाती फुलाए घूम रहे हैं। साइबर थाने में नए सिरे से नियुक्ति करने की जरूरत है।
