कांग्रेस में विवाद (AI generated Image)
Nagpur Congress Clash: अपने नेता राहुल गांधी के निर्देश पर कांग्रेस देशभर में संगठन सृजन अभियान चला रही है। इसके तहत संगठन के नवनिर्माण का कार्य किया जा रहा है। जिला, शहर व मंडल अध्यक्ष चयन की प्रक्रिया चल रही है। नागपुर शहर में शनिवार को केन्द्रीय पर्यवेक्षक अरुण यादव की उपस्थिति में रवि भवन में शहर अध्यक्ष के चयन की प्रक्रिया की शुरुआत की गई लेकिन पहले ही दिन कांग्रेस (Nagpur Congress) का ‘सृजन’ गुटबाजी के चलते विवादों में आ गया।
ठाकरे विरोधी गुट ने आरोप लगाया कि उन्हें यादव से मिलने से रोका गया और उनके साथ गाली-गलौज की गई। वहीं ठाकरे समर्थकों का कहना है कि जो लोग पार्टी में नहीं हैं या पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं, उन्हीं ने बैठक में बाधा डालने की कोशिश की। दरअसल, पर्यवेक्षक अरुण यादव की मौजूदगी में बैठक चल रही थी। उसी दौरान जिचकार गुट के कुछ कार्यकर्ता वहां पहुंचे लेकिन ठाकरे गुट के लोगों ने उन्हें भीतर जाने से रोका।
इसके चलते गाली-गलौज व धक्का-मुक्की भी हुई। सूत्रों के अनुसार, भाजपा से संबंध होने के आरोप वाले कुछ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को पर्यवेक्षकों से मिलने से रोका गया। पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें बैठक तक पहुंचने नहीं दिया गया। वहीं दूसरे गुट ने गाली-गलौज कर दबाव बनाने के भी आरोप लगाए।
पूर्व पार्षद किशोर जिचकार, संजय भिलकर, बाबा वकील, संजय कड़ू सहित लगभग 50 से अधिक वर्तमान और पूर्व पदाधिकारी व कार्यकर्ता बैठक में पहुंचे थे। असंतुष्टों ने आरोप लगाया कि ठाकरे समर्थकों ने उन्हें रोका। वहीं ठाकरे समर्थकों का कहना है कि इनमें से अधिकांश कार्यकर्ता पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और कई को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।
जिचकार ने कहा कि पार्टी नेता राहुल गांधी संगठन में मोनोपली खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे में सभी को अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए। भले ही किसी ने मनपा चुनाव लड़ा हो, वे कांग्रेस के बाहर नहीं थे। जिन्हें मिलना था, उन्हें बुलाया गया था। पहले जो हॉल में गए उनसे ही मुलाकात की गई। ‘वन टू वन’ का कोई मतलब नहीं रह गया है।
ठाकरे गुट के पदाधिकारियों का कहना है कि जो लोग पार्टी में ही नहीं हैं या पार्टी के खिलाफ काम करते हैं, वही आरोप लगा रहे हैं। पर्यवेक्षकों के संपर्क नंबर सभी के लिए खुले हैं और किसी को रोका नहीं जाता। बैठक में हमेशा गैरहाजिर रहने वाले कार्यकर्ता अचानक आकर विवाद खड़ा करते हैं जो उचित नहीं है। अब वही लोग शिकायत कर रहे हैं।
पार्टी नेताओं ने संकेत दिया है कि पश्चिम और उत्तर नागपुर सहित शहर के अन्य विधानसभा क्षेत्रों के असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को निलंबित करने की सूची शहर कांग्रेस (Nagpur Congress) द्वारा तैयार की गई है। किसने कब बगावत की, विपक्षी उम्मीदवारों का समर्थन किया या पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल रहा, इसकी पूरी जानकारी जुटाकर कार्रवाई की जाएगी।
यह भी पढ़ें – BJP की एकतरफा सत्ता को ललकारा! विदाई से पहले विकास ठाकरे ने कही बड़ी बात, क्या उनकी पसंद का होगा अगला अध्यक्ष?
इसी बीच दक्षिण-पश्चिम नागपुर में शाम को तलमले सभागृह में आयोजित बैठक में भी हंगामा होने की खबर मिली। पश्चिम नागपुर की तरह यहां भी पर्यवेक्षक जिया पटेल की मौजूदगी में हंगामा मचाया गया। हालांकि इस बारे में पदाधिकारियों ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
सरफराज खान नामक कार्यकर्ता ने कहा कि शुक्रवार को उनके साथ भी अपमानजनक व्यवहार किया गया। मनपा में विरोधी पक्षनेता संजय महाकालकर ने उन्हें पर्यवेक्षक से नहीं मिलने दिया जबकि वे कांग्रेस के प्रदेश प्रतिनिधि हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि न्याय के लिए वे राहुल गांधी के बंगले के सामने अनशन करेंगे।
वहीं महाकालकर ने बताया कि संगठन में पदाधिकारियों के चयन के लिए केंद्रीय स्तर से पारदर्शकता बरती जा रही है लेकिन कुछ कार्यकर्ता अनावश्यक विवाद करने का प्रयास कर रहे हैं। सरफराज जैसे कार्यकर्ता कांग्रेस के विरोध में चुनाव प्रचार करते रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पार्टी में गुटबाजी नहीं है। पर्यवेक्षक ने पहले ही अपील की है कि किसी विषय पर कार्यकर्ता असंतोष व्यक्त करना चाहें तो वे ‘वन टू वन’ बात कर सकते हैं।