प्रतीकात्मक तस्वीर (फोटो-सोशल मीडिया)
Nagpur Infrastructure Development: नागपुर स्टेशन उन्नत हो रहा है, एयरपोर्ट भी बेहतर स्थिति में है परंतु जब बात बस सेवा की आती है, तो शहरवासियों को ‘रोना’ आ जाता है। शहर के दोनों बस स्टैंड गणेशपेठ और मोर भवन की स्थिति बद से बदतर स्थिति में है।
पिलछे कई वर्षों से सुधार करने की बात हो रही है, लेकिन परिस्थिति बदली नहीं है। यात्रियों को ओटे, ईंटों, टूटी-फूटी कुर्सियों पर बैठकर बसों के लिए इंतजार करना पड़ता है। पिछले दिनों दोनों ही बस स्टैंडों को ‘बड़ा’ और सुविधाजक बनाने की घोषणा भी की गई थी। महाराष्ट्र राज्य इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमएसआईडीसी) दोनों ही प्रोजेक्ट पर काम शुरू कर चुका है।
दोनों की आरंभिक प्लानिंग तैयार भी कर ली गई है और संबंधित विभागों को सौंप दी गई है। मोर भवन का निर्माण लगभग 800 करोड़ रुपये से किया जाएगा। यह आपली बस और लाल परी के लिए मुख्य केंद्र होगा। इससे दूसरे जिलों से आने वाले यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा संभव हो सकेगी। जो आरंभिक प्लानिंग की गई है, उसके अनुसार तल माले से ‘आपली बस’ छूटेगी, जबकि पहले माले पर ‘लाल परी’ को जगह दी जाएगी। बाकी फ्लोर पर व्यावसायिक गतिविधियां होंगी। बेसमेंट में पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। जानकारी के अनुसार कुल 48 बसों के एक साथ खड़े होने की सुविधा विकसित की जाएगी।
प्लानिंग में सबसे अच्छी बात यह है कि मोर भवन बस स्टैंड में बसों की एंट्री और एग्जिट पीछे दी जा रही है। पीछे से बसों के आने-जाने से मुख्य मार्ग में जाम से छुट्टी मिल जाएगी। पैसेंजर और मॉल में जाने वालों के लिए सामने से भी रास्ता होगा। पिक अप एंड ड्रॉप के लिए भी सामने से सुविधा देने की योजना बनाई गई है।
जानकारी के अनुसार मोर भवन में उपलब्ध जगह एमएसआरटीसी, मनपा और वीकेवी की है। तीनों के बीच समन्वय स्थापित करना होगा और इन्हें अपने-अपने हिस्से की जमीन देनी होगी। इसके बाद स्थिति एमओयू तक पहुंचेगी। तीनों ही विभागों को आरंभ में एनओसी प्रदान करना होगा। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं को जोर लगाना पड़ेगा। अन्यथा प्रोजेक्ट कागजों में ही काफी समय तक रह सकता है और लोगों की परेशानी यथावत बनी रह सकती है।
स्थापित करना होगा और इन्हें अपने-अपने हिस्से की जमीन देनी होगी। इसके बाद स्थिति एमओयू तक पहुंचेगी। तीनों ही विभागों को आरंभ में एनओसी प्रदान करना होगा। इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं को जोर लगाना पड़ेगा। अन्यथा प्रोजेक्ट कागजों में ही काफी समय तक रह सकता है और लोगों की परेशानी यथावत बनी रह सकती है।
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एमएसआईडीसी के अधिकारियों ने बताया कि दोनों ही नागपुर बस स्टैंड पर ऑटो के लिए अलग से ड्रॉप एंड गो की सुविधा विकसित की जाएगी। एक साथ 20-25 ऑटो खड़े हो सकते हैं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए यह अपर्याप्त लग रहा है क्योंकि दोनों ही स्टैंड पर ऑटो की संख्या काफी अधिक होती है और इसी के कारण स्टैंड के बाहर दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। ऑटो के लिए दोनों ही स्टैंड पर पर्याप्त व्यवस्था होने पर ही समस्या से निजात मिल सकती है। इस ओर फाइनल डीपीआर बनाने पर ध्यान देने की जरूरत है।
एमएसआईडीसी के पास ही गणेशपेठ बस स्टैंड को भी विकसित करने की जिम्मेदारी है। एमएसआईडीसी ने आरंभिक डीपीआर बनाकर एमएसआरटीसी को सौंप दिया है। इस प्रोजेक्ट पर भी लगभग 850 करोड़ रुपये खर्च आने का प्रारंभिक अनुमान है। एमएसआरटीसी को इसमें निर्णय लेना है। इसके लिए विभाग को बोर्ड और मंत्री से मंजूरी लेनी होगी।
निश्चित रूप से इस डिजाइन या डीपीआर को आगे बढ़ाने के लिए स्थानीय नेतृत्व को आगे आना होगा ताकि निर्णय जल्द से जल्द हो और गाड़ी पटरी पर दौड़ सके। गणेशपेठ का कुल क्षेत्र 11.1 एकड़ है।
इसमें भी तल माले में 30 बसों को अराइवल में रखे रहने की सुविधा होगी, जबकि 50 गाड़ियों के लिए पहले माले पर डिपार्चर का स्थान होगा। इस प्रकार आगमन और प्रस्थान के लिए अलग-अलग व्यवस्था की जा रही है ताकि यात्रियों को सहूलियत हो सके, डिपार्टर स्थल पर एक साथ 46 बसों को खड़ी करने की व्यवस्था होगी। दोनों ही प्रोजेक्ट में बड़ा कमर्शियल स्पेस और होटल बनाने की भी योजना है। इससे यात्रियों को स्टैंड के अंदर ही खरीदारी करने और रहने की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।