भांडेवाड़ी में लगी आग (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur Dumping Yard: शनिवार दोपहर भांडेवाड़ी के डंपिंग यार्ड में अचानक आग लग गई। आग लगने की सूचना मिलते ही अग्निशमन विभाग की 7 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का कार्य शुरू किया। घंटों की कड़ी मशक्कत और पानी का छिड़काव करके आग पर काबू पा लिया गया। हालांकि डंपिंग यार्ड से धुआं निकल रहा था। इसलिए सुरक्षा उपाय के तौर पर वहां एक दमकल गाड़ी तैनात रखी गई।
काफी देर तक कूलिंग ऑपरेशन जारी रहा। बता दें कि पिछले 9 महीनों में भांडेवाड़ी डंपिंग यार्ड में आग लगने की यह दूसरी घटना है। पिछले साल अप्रैल माह में लगी आग के कारण सैकड़ों नागरिकों को अपने घर खाली करने पड़े थे। इस वजह से नागरिकों में डर का माहौल बना हुआ है। भांडेवाड़ी डंपिंग यार्ड में भारी मात्रा में कचरा जमा हो गया था, जिसे हटाया और संसाधित किया जा रहा था।
शनिवार की दोपहर करीब 3:30 बजे इसी कचरे के ढेर में अचानक आग लग गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने तुरंत दमकल विभाग को घटना की जानकारी दी। डंपिंग यार्ड में लगी भीषण आग की सूचना मिलते ही मुख्य अग्निशमन अधिकारी तुषार बारहाते ने एक के बाद एक कुल 7 दमकल गाड़ियों को डंपिंग यार्ड की ओर रवाना किया। दमकल विभाग के जवानों ने देर शाम तक कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
हालांकि कचरे के ढेर से धुआं निकल रहा था। इस कारण सुरक्षा के मद्देनजर अगले 24 घंटों के लिए एक दमकल वाहन को मौके पर ही तैनात रखा गया। एक बार फिर डंपिंग यार्ड में लगी आग को देख नागरिकों में आशंका थी कि कहीं पिछले साल अप्रैल में हुई घटना की तरह दोबारा घर न छोड़ना पड़े। चूंकि यह कचरे का ढेर काफी पुराना था, इसलिए दावा किया गया है कि आग अंदर मौजूद ज्वलनशील गैस के कारण लगी।
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इस बीच आग लगने की सूचना मिलते ही मनपा की अतिरिक्त आयुक्त वसुमना पंत, अधीक्षक अभियंता डॉ. श्वेता बनर्जी और मुख्य अग्निशमन अधिकारी तुषार बारहाते तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। पंत ने निर्देश दिया कि आग को पिछले साल की तरह फैलने से रोकने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए जाएं।
शनिवार को भांडेवाड़ी डंपिंग यार्ड में लगी आग ने स्थानीय नागरिकों को अप्रैल 2025 में लगी आग की याद दिला दी। उस दौरान लगभग 70 परिवारों को अपना घर छोड़कर जाना पड़ा था। 2 से 3 दिन तक आग सुलगती रहने के कारण पवनशक्तिनगर, अब्बूमियानगर, सावननगर, साहिलनगर, अंतुजीनगर, देवीनगर, सूरजनगर, संघर्षनगर और मेहरनगर के निवासी बेघर हो गए थे। धुएं से स्थानीय नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी असर पड़ा था। लोगों के मन में भय है कि इस स्थिति का सामना दोबारा न करना पड़े।