खुद की तिजोरी में पड़े हैं 526 करोड़, पर साहब चले हैं बाजार से कर्ज लेने! नागपुर मनपा का अनोखा पॉकेट मनी बजट
Nagpur Property Tax: नागपुर मनपा का संपत्ति कर बकाया 526 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि यह राशि वसूल हो जाए तो विकास कार्यों के लिए कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर मनपा, संपत्ति कर बकाया, टैक्स वसूली,प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur Municipal Corporation Property Tax: नागपुर जिले में प्रशासन की क्षमता के आधार पर मनपा आयुक्त की ओर से केवल सम्पत्ति कर से 400 से 500 करोड़ रुपये की आय प्राप्त होने की उम्मीद बजट में जताई गई थी। यहां तक कि इस वित्तीय वर्ष में विकास के लक्ष्य को पाने के लिए 400 करोड़ का कर्ज लेने का प्रावधान भी रखा गया, किंतु आश्चर्यजनक यह कि विकास के लिए न तो मनपा को कर्ज लेने की जरूरत है और न ही राज्य सरकार से अतिरिक्त निधि की दरकार हो सकती है।
इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टैक्स विभाग की क्षमता नहीं बढ़ाए जाने के कारण अब पुराने बकाया राशि का आंकड़ा 526 करोड़ तक पहुंच गया है जबकि टैक्स का टार्गेट 749 करोड़ के पार जा चुका है। यदि मनपा स्वयं का बकाया ही वसूल कर ले, तो मनपा की तिजोरी अच्छी खासी भारी होने की संभावना अधिकारियों ने जताई है।
गंभीर नहीं जोन कार्यालय
वित्तीय वर्ष 2026-2027 के लिए जारी की गई ‘नेट डिमांड’ के नए आंकड़ों ने एक चौंकाने वाली तस्वीर पेश की है। शहर के 10 अलग-अलग जोनों में मौजूद कुल 6,98,508 संपत्तियों से कुल 749,82,37,810 रुपये की भारी-भरकम राशि वसूली की जानी है। इस रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता का विषय चालू वर्ष की मांग से ज्यादा पिछले वर्षों का भारी बकाया है।
सम्बंधित ख़बरें
भंडारा में नशे के खिलाफ पुलिस का बड़ा अभियान, खुलेआम गांजा पीते 3 आरोपी अरेस्ट
मुंबई पर जल संकट का खतरा, अपर वैतरणा बांध का उपयोगी जल भंडार शून्य; राज्य सरकार ने दी बड़ी राहत
गोंदिया मछली मार्केट में गंदगी और दुर्गंध से व्यापार प्रभावित, ग्राहकों को भारी परेशानी
नागपुर HC में कॉर्पोरेट पावर का इम्तिहान: करोड़ के बैंक ऋण मामले में CBI बनाम याचिकाकर्ता की दिलचस्प जंग
हालांकि बकाया का टार्गेट पूरा करने के लिए हाल ही में सभी जोन के सहायक आयुक्तों की बैठक तो ली गईं, किंतु जोन के सहायक आयुक्तों की ओर से आवश्यकता अनुरूप गंभीरता नहीं दिखाए जाने के कारण लक्ष्य को पाना लगभग असंभव नजर आ रहा है।
बकाया राशि ने बढ़ाई चिंता
आंकड़ों के अनुसार, प्रशासन के लिए पुरानी वसूली करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। 749।82 करोड़ रुपये के ‘ग्रैंड टोटल’ में से 526,85,42,800 रुपये केवल पुरानी बकाया राशि के रूप में लंबित है।
वहीं, इस चालू वर्ष की मांग बकाया राशि के आधे से भी कम 222.96,95,981 रुपये है, अधिकारिक जानकारी के अनुसार सिटी में कुछ बड़े बकायादार भी है जिनके खिलाफ वसूली का डंडा चलते ही राजनीतिक प्लेटफॉर्म से दबाव आने लगता है। यदि राजनीतिक प्लेटफॉर्म दखलअंदाजी बंद कर दें, तो निश्चित ही इसमे से बड़ा आंकड़ा छुआ जा सकता है।
2 जोन सबसे फिसड्डी
यह आंकड़े प्रशासन की कर वसूली प्रणाली की पोल खोलते हैं। चालू वर्ष की मांग (लगभग 223 करोड़) की तुलना में पुरानी बकाया राशि (लगभग 527 करोड़) दोगुनी से भी अधिक है। आसीनगर और मंगलवारी (कुल मांग 111.5 करोड़) जैसे बड़े जोनों पर विशेष अभियान चलाकर वसूली करने की आवश्यकता है, ताकि शहर के विकास कार्यों के लिए इस अटके हुए राजस्व का उपयोग किया जा सके।
आसीनगर जोन में सबसे ज्यादा संपत्तियां और सर्वाधिक बकाया
- आसीनगर जोन की स्थिति सबसे ज्यादा गंभीर है। यहां संपत्तियों की संख्या सर्वाधिक 1,20,892 है।
- इस जोन की कुल मांग 146,87.67.201 रुपये है, जो शहर के सभी जोनों में सबसे अधिक है।
- अकेले आसीनगर जोन में 122 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि बकाया है।
गांधीबाग में सबसे कम मांग
गांधीबाग जोन में 27,870 संपत्तियां हैं और यहां की कुल मांग सबसे कम, मात्र 23,49,12,306 रुपये है।
यह भी पढ़ें:-नागपुर HC में कॉर्पोरेट पावर का इम्तिहान: करोड़ के बैंक ऋण मामले में CBI बनाम याचिकाकर्ता की दिलचस्प जंग
सभी 10 जोनों का विस्तृत आंकड़ा
| क्रमांक | जोन | संपत्तियां (संख्या) | डिमांड (₹) |
|---|---|---|---|
| 1 | लक्ष्मीनगर | 80,093 | 98,44,57,822 |
| 2 | धरमपेठ | 45,807 | 53,77,24,542 |
| 3 | हनुमाननगर | 93,794 | 82,74,41,741 |
| 4 | धंतोली | 22,690 | 30,58,15,453 |
| 5 | नेहरूनगर | 1,11,313 | 89,80,17,263 |
| 6 | गांधीबाग | 27,870 | 23,49,12,306 |
| 7 | सतरंजीपुरा | 42,549 | 31,11,75,393 |
| 8 | लकड़गंज | 81,794 | 81,46,13,890 |
| 9 | आसीनगर | 1,20,892 | 1,46,87,67,201 |
| 10 | मंगलवारी | 71,706 | 1,11,53,13,170 |
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से ललेन्द्र करवाड़े की रिपोर्ट
