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रिंग रोड केस: बिना अधिकार पत्र कोर्ट में पेश हुए सरकारी वकील तो FIR के निर्देश दे सकता है हाई कोर्ट

MSRDC Land Case: एमएसआरडीसी रिंग रोड भूमि अधिग्रहण मामले में हाई कोर्ट ने कहा कि यदि सरकारी वकील बिना अधिकार पत्र के कोर्ट में पेश हुए पाए गए तो उनके खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

  • Written By: अंकिता पटेल
Updated On: Aug 01, 2026 | 01:20 PM

एमएसआरडीसी, रिंग रोड, भूमि अधिग्रहण,(सोर्स: एआई फोटो)

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MSRDC Land Acquisition Hearing: महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (एमएसआरडीसी) के रिंग रोड प्रोजेक्ट से जुड़े भूमि अधिग्रहण मामले में न्यायाधीश अनिल पानसरे और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने शुक्रवार को सुनवाई के दौरान बेहद कड़ा रुख अपनाया।

अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जांच में यह पाया जाता है कि सरकारी वकील बिना किसी आधिकारिक अधिकार पत्र के रिफरेंस कोर्ट में पेश हुए थे तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

नोटिस मिलने पर लगी जानकारी

अपीलकर्ता के अनुसार जब एमएसआरडीसी को मामला लागू कराने का नोटिस तामील किया गया तब उन्हें पहली बार इस फैसले की जानकारी हुई।

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इसी कारण हाई कोर्ट में अपील दाखिल करने में देरी हुई जिसके लिए विलंब माफी का आवेदन किया गया है। अदालत ने चिंता जताते हुए कहा कि अधिग्रहण संस्था के हितों की रक्षा नहीं की गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने राज्य के अतिरिक्त सरकारी वकील को निर्देश दिया कि वे आज के आदेश के आलोक में एक विशिष्ट जवाब दाखिल करें और रिफरेंस कोर्ट में प्रतिनिधित्व के लिए जारी किए गए अधिकार पत्र की प्रति अदालत में पेश करें।

बिना अनुमति 10 गुना बढ़ोतरी का आरोप

मामले की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता (कार्यकारी अभियंता, एमएसआरडीसी, रिंग रोड प्रोजेक्ट) की ओर से पेश अधिवक्ता ए।डी। मोहागांवकर ने अदालत को बताया कि रिफरेंस कोर्ट के समक्ष एमएसआरडीसी को गैर-आवेदक नंबर 2 के रूप में पक्षकार बनाया गया था।

यह भी पढ़ें:-अमरावती में नदियां उफान पर, 16 लोगों का सफल रेस्क्यू; DCM सुनेत्रा पवार ने जिला प्रशासन को दिए सख्त निर्देश

हालांकि एमएसआरडीसी द्वारा कोई आधिकारिक अधिकार या सहमति न दिए जाने के बावजूद सरकारी वकील वहां पेश हो गए। अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि रिफरेंस कोर्ट में एमएसआरडीसी के हितों की रक्षा के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए, न तो कोई बहस की गई और न ही कोई साक्ष्य प्रस्तुत किए गए। इसके चलते भूमि अधिग्रहण अधिकारी द्वारा तय की गई मुआवजा राशि को रिफरेंस कोर्ट ने 10 गुना बढ़ा दिया।

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Published On: Aug 01, 2026 | 01:20 PM

Topics:  

  • Bombay High Court
  • Maharashtra News
  • MSRDC
  • Nagpur News

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