सांसद वानखेड़े को झटका, न्यायालय ने खारिज की याचिका, कहा- ‘संसद के मुद्दे हाई कोर्ट में क्यों?’
Election Boycott News: अमरावती के 22 गांवों में बिजली-पानी-सड़क की भारी कमी पर हाई कोर्ट ने सांसद बलवंत वानखेड़े को फटकार लगाई। योजनाएं ठप, सौर संयंत्र खराब, ग्रामीणों ने चुनाव बहिष्कार की चेतावनी दी।
- Written By: प्रिया जैस
हाई कोर्ट (सौजन्य-सोशल मीडिया)
High Court: हाई कोर्ट ने अमरावती के सांसद बलवंत वानखेड़े को एक गंभीर सवाल पूछते हुए फटकार लगाई कि ‘जनप्रतिनिधि संसद में मुद्दे उठाने की बजाय उच्च न्यायालय में याचिका क्यों दायर कर रहे हैं?’ कोर्ट ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि कोर्ट इसके लिए सुबह 10.30 से शाम 4.30 बजे तक नहीं बैठता है।
उच्च न्यायालय ने गुरुवार को सांसद वानखेड़े द्वारा दायर की गई जनहित याचिका को खारिज कर दिया, साथ ही सुनवाई के दौरान न्यायाधीश अनिल किल्लोर और न्यायाधीश रजनीश व्यास ने याचिका में उठाए गए मुद्दों की गंभीरता को देखते हुए स्वतः संज्ञान ले लिया। न्यायालय ने इस मामले में अधि। निखिल कीर्तने और अधिवक्ता पार्थ मालवीय को न्यायालयीन मित्र नियुक्त किया।
क्या थे याचिका के मुख्य मुद्दे?
खारिज की गई याचिका अमरावती जिले के चिखलदरा और धारणी तालुका के 22 दुर्गम गांवों से संबंधित थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन गांवों में बिजली, पीने का पानी, सड़क कनेक्टिविटी और आवश्यक बुनियादी ढांचे जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
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याचिका में यह भी कहा गया कि सरकार को कई बार निवेदन दिए जाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई जिससे आम नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। सरकारी निष्क्रियता के कारण ग्रामवासियों पर गंभीर संकट गहराया हुआ है और ये गांव आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक विकास के अवसरों से वंचित हैं।
योजनाएं अटकीं, अंधेरे में गांव
-धारणी तहसील की रंगुबेली ग्राम पंचायत में पीने के पानी के लिए केवल एक ही कुआं उपलब्ध है। 2021 में जल जीवन मिशन के तहत नल योजना स्वीकृत हुई थी लेकिन वन और राजस्व विभाग के बीच गलतफहमी के चलते यह योजना रुकी हुई है।
– गांवों में बिजली उपलब्ध नहीं है और हर घर बिजली योजना के तहत स्थायी विद्युत आपूर्ति की मांग भी लागू नहीं की गई। गांव अस्थायी सौर सुविधाओं पर निर्भर हैं।
– गांवों को जोड़ने वाली कंक्रीट की सड़कें नहीं हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर स्वीकृत हुए थे लेकिन निर्माण के लिए तापी नदी की रेत वन विभाग द्वारा उपलब्ध न कराए जाने के कारण निर्माण कार्य रुक गया है।
सौर संयंत्र भी निष्क्रिय
22 गांवों में सौर घरेलू प्रकाश व्यवस्था स्थापित की गई थी लेकिन वह भी कार्यान्वित नहीं हो सकी है जिससे गांव अभी भी अंधेरे में हैं। मेसर्स पर्ल एंटरप्राइजेस कंपनी को यह व्यवस्था स्थापित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। आंकड़ों के अनुसार 29 गांवों में लगाए गए कुल 3,598 सौर संयंत्रों में से 1,940 संयंत्र आंशिक रूप से कार्यरत हैं।
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वहीं 1,081 संयंत्रों के नियंत्रक और बैटरी खराब हैं और 6,535 एलईडी बल्ब पूरी तरह से बंद पड़े हैं। इसके अलावा 1,733 पंखे भी निष्क्रिय हैं। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान के तहत ऑफ-ग्रिड सौर बिजली आपूर्ति की योजना भी रुकी हुई है।
चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
सांसद वानखेड़े के वकील ने कोर्ट को बताया कि पिछले 2 वर्षों में कई निवेदनों के बावजूद स्थिति में सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, इसलिए उन्हें हाई कोर्ट आना पड़ा। समस्याओं पर ध्यान न दिए जाने के कारण ग्रामवासियों ने लोकसभा और जिला परिषद चुनावों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है।
