नागपुर परिषद चुनाव में पैसों की एंट्री? निर्विरोध जीत के बाद अब वोटों की जंग, भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने
Nagpur MLC Election: नागपुर विधान परिषद चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर है। क्रॉस वोटिंग, वोट मैनेजमेंट और धनबल के आरोपों के बीच राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर विधान परिषद चुनाव, (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Legislative Council Polls: नागपुर विधान परिषद चुनाव में 5 सीटों पर निर्विरोध चुनाव के बाद अब भाजपा सहित महायुति के घटक दलों शिंदे शिवसेना और राकां सुनेत्रा पवार पार्टी पर मविआ नेता आरोप लगा रहे हैं कि दबाव व लालच दिखाकर विरोधी दलों के उम्मीदवारों से नामांकन वापस करवाने का कार्य किया गया। नामांकन वापसी के लिए करोड़ों रुपये दिये जाने के आरोप तक लगाए जा रहे हैं। अब 12 सीटों पर 18 जून को मतदान होने वाला है और जिन सीटों पर दोनों पार्टियों में 50-100 वोटों का ही अंतर है वहां जमकर ‘माया’ की ताकत दिखाने की संभावना जताई जा रही है।
नागपुर सीट की बात करें तो यहां भाजपा व कांग्रेस के उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला है। चूंकि कुल 836 वोटों में से 550 के करीब वोट भाजपा के हैं, इसलिए वोटर्स के ‘रेट’ या तो काफी कम रहने या फिर पिकनिक स्पॉट की सैर व आलीशान खातिरदारी तक सीमित रहने की बात कही जा रही है।
बीजेपी के उम्मीदवार राजीव पोतदार ने दावा किया है कि उनके अपनी पार्टी के सारे वोट के अलावा कांग्रेस-मविआ के भी कम से कम 50 वोट हासिल होने वाले हैं। उनके इस दावे के बाद यह कयास लगाया जा रहा है कि भाजपा कुछ पैकेट्स में अपना वर्चस्व बढ़ाने के लिए विपक्ष के वोटों पर ‘माया’ लुटा सकती है। उधर, कांग्रेस नेताओं ने दावा किया है कि उनके सदस्य भरोसेमंद हैं और उन पर पूरा विश्वास है।
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भाव बढ़ने की उम्मीद
इस चुनाव में भाजपा के पास उपलब्ध मजबूत संख्याबल के कारण फिलहाल मतदाताओं का भाव कम हुआ है लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि मतदान का दिन नजदीक आते ही भाव बढ़ेंगे। बीजेपी के पास भले ही विपक्ष की तुलना में दोगुने से अधिक वोट हों, लेकिन किसी भी तरह की गड़बड़ी या दल-बदल से बचने के लिए पार्टी ने माइक्रो प्लान तैयार किया है। वहीं कांग्रेस भी अपने मतों में टूट-फूट को रोकने के लिए रणनीति बना रही है। भाजपा नेताओं का मानना है कि अन्य मतदाताओं की आवश्यकता नहीं है, इसलिए विपक्षी मतदाताओं को लेकर अभी कोई विशेष योजना नहीं बनाई गई है।
हालांकि भविष्य की जरूरत और परिस्थितियों को देखते हुए कुछ सार्थक समझौते होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार भाजपा के पोल मैनेजरों को निर्देश दिए गए हैं कि पर्यटन पर जाने वाले मतदाताओं के लिए पांच सितारा स्तर की व्यवस्था करें, लेकिन उन्हें किसी प्रकार का आर्थिक या अन्य ‘कमिटमेंट’ न दें। इससे मतदाताओं का पर्यटन तो होगा, लेकिन उन्हें किसी आर्थिक लाभ की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए।
गोवा, पचमढ़ी और उज्जैन की सैर
ग्रामीण क्षेत्र के मतदाताओं के लिए 13-14 अलग-अलग समूह बनाए जा रहे है। उमरेड की 3 नगर परिषदों और पंचायतों का एक समूह बनाया गया है। इसी तरह खापा-सावनेर तथा कलमेश्वर-मोहपा के समूह बनाए गए हैं। दो-तीन समूहों का एक जत्था एक साथ जाएगा। फिलहाल गोवा, गणपतिपुले, पचमढ़ी और उज्जैन जैसे पर्यटन स्थलों का चयन किया गया है।
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11-12 तारीख को इन जत्थों को रवाना किया जाएगा। बता दें कि चुनाव निर्विरोध कराने के लिए पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने काफी प्रयास किए थे, लेकिन कांग्रेस नेताओं ने उनका प्रस्ताव ठुकरा कर अपना उम्मीदवार मैदान में उतार दिया, अब चुनाव की पूरी जिम्मेदारी बावनकुले के कंधों पर है। इस बार प्रवीण दटके चुनाव प्रमुख है, जबकि पूर्व विधायक सुधाकर कोहले, पूर्व जिलाध्यक्ष अरविंद गजभिये, जिलाध्यक्ष आनंदराव राऊत और मनोहर कुंभारे को विभिन्न जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।
कांग्रेस के सामने चुनौती लेकिन भरोसा कायम
कांग्रेस के सामने अपने मतदाताओं को एकजुट बनाए रखने की बड़ी चुनौती है। पर्यवेक्षक नितिन राऊत, पूर्व मंत्री सुनील केदार, सांसद श्याम बर्वे, विधायक विकास ठाकरे, पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र मुलक और शहर अध्यक्ष प्रफुल्ल गुडधे सहित कई नेता लगातार बैठकों में रणनीति तैयार कर रहे हैं।
इस बात पर चर्चा हो रही है कि मतदाताओं को एकजुट कैसे रखा जाए, उन्हें विपक्षी दलों के संपर्क में आने से कैसे रोका जाए और उन्हें कहां रखा जाए। नितिन राऊत फिलहाल बाहर है और उनके लौटने के बाद पूरी रणनीति को अंतिम मंजूरी दी जाएगी।
कांग्रेस के एक नेता ने दावा किया कि पार्टी को अपने मतदाताओं के टूटने का कोई खतरा नहीं है। इसलिए उन्हें किसी पर्यटन यात्रा की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपने मतदाताओं को संभाले, कांग्रेस अपनी संख्या बढ़ाने का पूरा प्रयास करेगी।
