April Fool पर नींद उड़ाने वाला ‘वॉर लॉकडाउन’ नोटिस वायरल! जानें क्यों सच मान बैठे लोग और क्या कहता है कानून?
April Fool National Emblem Misuse India: सावधान! 'वॉर लॉकडाउन' के नाम पर राजमुद्रा का दुरुपयोग पड़ा महंगा। अप्रैल फूल के मजाक पर कानूनी शिकंजा, जानें राजचिह्न अधिनियम 2005 के कड़े नियम।
- Written By: प्रिया जैस
भारतीय राजमुद्रा का दुरुपयोग (सौजन्य-सोशल मीडिया)
April Fool Prank Legal Action: अप्रैल फूल के मौके पर मजाक करने के नाम पर इस बार कुछ लोगों ने कानूनी सीमाएं पार कर दीं। ‘वॉर लॉकडाउन नोटिस’ के नाम से वाट्सएप पर तेजी से वायरल हुई एक पीडीएफ ने कई लोगों की कुछ समय के लिए नींद उड़ा दी। इसकी वजह यह रही कि उस पीडीएफ में भारतीय राजमुद्रा (राष्ट्रीय चिह्न) का उपयोग कर उसे आधिकारिक सरकारी आदेश जैसा दिखाया गया था जिससे शुरुआत में कई लोगों ने इसे सच मान लिया।
मजाक साबित होने से ली राहत की सांस
हालांकि जब लोगों ने पीडीएफ डाउनलोड की तो उसमें ‘अप्रैल फूल’ का संदेश दिखाई दिया जिससे स्पष्ट हुआ कि यह केवल एक मजाक था। इसके अलावा कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पिछले कुछ दिनों में लॉकडाउन को लेकर अफवाहें भी फैलाई गई थीं जिससे लोगों के मन में पहले से ही संशय बना हुआ था।
ऐसे में इस फर्जी नोटिस को बड़े पैमाने पर शेयर किया गया। कई लोगों ने इस कृत्य को बेहद गैर जिम्मेदाराना बताया है। उनका कहना है कि राष्ट्रीय संप्रभुता के प्रतीक राजमुद्रा का इस्तेमाल केवल मजाक के लिए करना पूरी तरह अनुचित है और इससे समाज में भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
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दंडनीय अपराध है
कानूनी दृष्टि से भारतीय राजमुद्रा का उपयोग ‘राजचिह्न (अनुचित उपयोग निवारण) अधिनियम, 2005’ के तहत सख्ती से नियंत्रित है। बिना अनुमति इसके उपयोग को दंडनीय अपराध माना जाता है। इसके अलावा, सरकारी आदेश का आभास पैदा कर लोगों को गुमराह करना भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत भी ऐसे भ्रामक संदेशों पर कार्रवाई संभव है।
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ऐसी हरकतें असहनीय
वरिष्ठ कानून विशेषज्ञ अतुल पांडे ने कहा अभिव्यक्ति और बोलने की स्वतंत्रता लोकतंत्र के मूल अधिकार है लेकिन इसका यह अर्थ नहीं है कि कोई भी भारतीय राजमुद्रा का दुरुपयोग करे। ऐसी हरकतें किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।
