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नीट पेपर लीक के बाद उठे सवाल: क्या बोर्ड अंकों को वेटेज देने से घटेगी कोचिंग पर निर्भरता?

NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक विवाद के बीच शिक्षा विशेषज्ञों ने कोचिंग पर निर्भरता और अभिभावकों का बोझ कम करने के लिए 12वीं बोर्ड परीक्षा के अंकों को 50-50 फॉर्मूले के तहत वेटेज देने की मांग की है।

  • Written By: रूपम सिंह
Updated On: May 22, 2026 | 12:10 PM

नीट पेपर लीक फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)

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Coaching Business NEET Paper Leak: नीट पेपर लीक प्रकरण में अब नये-नये खुलासे हो रहे हैं। जांच के दौरान महाराष्ट्र से जुड़े तार देश के अन्य राज्यों तक फैले होने की जानकारी सामने आ रही है। अब अगली नीट के लिए उच्च स्तरीय व्यवस्था की जा रही है। विविध तरह की सख्ती की बात भी हो रही है लेकिन शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो बोर्ड परीक्षा में मिलने वाले अंकों को वेटेज दिया जाये तो कोचिंग-ट्यूशन पर बढ़ती निर्भरता कम हो सकती है। इतना ही नहीं 50-50 या 60-40 अंकों के फॉर्मूले पर सरकार को नीति बनाने की जरूरत है।
एक दौर था जब 12वीं के अंकों के आधार पर ही इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिलता था।

फिर सरकार ने नीति में बदलाव किया। प्रवेश परीक्षाओं के माध्यम से मेडिकल में प्रवेश दिया जाने लगा। नीट परीक्षा देशभर के लिए एक समान की गई लेकिन पाठ्यक्रम में बदलाव नहीं हुआ। परिणामस्वरूप जूनियर कॉलेजों की किताबें कम पड़ने लगीं और विद्यार्थियों को कोचिंग-ट्यूशन का सहारा लेना पड़ा। देखते ही देखते कोचिंग संस्थाओं ने जूनियर कॉलेजों के साथ एक समानांतर व्यवस्था बना ली है। वर्तमान में कॉलेजों में नहीं बल्कि कोचिंग में क्लासेस भरी रहती हैं। शहर में नीट की तैयारी कराने वाली

छोटी-बड़ी मिलाकर करीब 250 संस्थाएं हैं। वहीं हर वर्ष करीब 25,000 छात्र परीक्षा की तैयारी करते हैं। नागपुर में वर्धा, भंडारा, गोंदिया, गड़चिरोली, बालाघाट, सिवनी सहित अन्य शहरों के छात्र तैयारी करने आते हैं। हर कोचिंग का फीस ढांचा भी अलग-अलग है लेकिन सभी की कम से कम वार्षिक फीस 1।5 लाख होती है। इस हिसाब से देखा जाए तो शहर में करीब 400-500 करोड़ का कोचिंग का कारोबार होता है।

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बोर्ड के अंकों को मिले महत्व

दरअसल बोर्ड के 12वीं के अंकों का महत्व कम होने की वजह से ही नीट और जेईई, सीईटी के लिए कोचिंग जरूरी हो गई है क्योंकि स्टेट बोर्ड का सिलेबस नीट, जेईई की जरूरत पूरा नहीं कर पाता। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बोर्ड परीक्षा के अंक और नीट के अंकों में 50-50 या फिर 40-60 का अनुपात रखा जाए तो क्लास रूम में छात्रों

की भीड़ बढ़ सकती है। इसके लिए सरकार को नीति बनानी होगी। सरकार ने प्रवेश परीक्षाओं को तो अनिवार्य कर दिया लेकिन राज्य के पाठ्यक्रम को उन परीक्षाओं के लायक नहीं बनाया। यदि उक्त अनुपात को लागू किया जाये तो भविष्य में कोचिंग-ट्यूशन की निर्भरता कम हो सकती है।

नीट ही रद्द करे सरकार

तायवाडे शिक्षाविद् डॉ. बननराव तायवाडे ने बताया कि बोर्ड की परीक्षा के अंकों का महत्व कम होने से ही कोचिंग संस्थाओं की संख्या बढ़ी है। जूनियर कॉलेजों में प्रवेश नहीं मिलते और कोचिंग से टाइअप करने वालों के पास भीड़ होती है। व्यवस्था में बदलाव के लिए आधारभूत स्तर पर काम करना होगा। इसके लिए सरकार को बोर्ड और नीट के

अंकों में 50-50 का अनुपात रखना होगा या फिर नीट की परीक्षा ही रद्द की जानी चाहिए। वैसे भी दक्षिण भारत के कई राज्य नीट की सख्ती के खिलाफ है। 12वीं के अंकों को महत्व मिलना यानी छात्रों का सर्वांगीण विकास होगा। अभिभावकों पर अतिरिक्त खर्च का बोझ भी कम होगा।

यह भी पढ़ें:- नागपुर में बढ़ा बड़ा कर्ज लेने का ट्रेंड, 6 साल में लोन पोर्टफोलियो 13,124 करोड़ से बढ़कर 79,210 करोड़ पहुंच

‘एडवांस’ की तरह अंक हो अनिवार्य

गव्हाणकर ने बताया कि विदर्भ जूनियर कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन के महासचिव डॉ। अशोक गव्हाणकर ने बताया कि अक्सर शिक्षक नहीं पढ़ाते, इसलिए छात्र कोचिंग में जाते हैं, ऐसा आरोप लगाया जाता है। लेकिन इसके पीछे मुख्य वजह सरकार की नीति ही है। जूनियर कॉलेजों में शिक्षकों की प्राथमिकता पाठ्यक्रम पूरा करना होता है।

साथ ही स्टेट बोर्ड का पाठ्‌यक्रम नीट और जेईई की जरूरत पूरी नहीं कर पाता, यही वजह है कि अब सरकार को नीति में बदलाव करने की जरूरत है। बोर्ड के 40 फीसदी और नीट के 60 फीसदी अंकों के आधार पर मेरिट सूची बनाई जानी चाहिए। सरकार ने वर्तमान में केवल एडवांस परीक्षा के लिए ही 12वीं में 75% अंक अनिवार्य किए है। इसी तरह की अनिवार्यता नीट में भी आवश्यक है।

Neet paper leak nagpur experts demand weightage for 12th board marks

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Published On: May 22, 2026 | 12:10 PM

Topics:  

  • Maharashtra News
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  • NEET Paper Leak

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