

हाईकोर्ट में मशीन की खरीद और स्थापना में देरी का मामला।
NMRDA और महावितरण को याचिका में प्रतिवादी बनाने की अनुमति मिली।
वर्ष 2018 में मशीन खरीद के लिए 23.20 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई थी।
देरी के चलते मशीन की कीमत सीमा शुल्क सहित करीब 48 करोड़ रुपये हो गई।
Linear Accelerator Nagpur GMC: नागपुर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल में कैंसर के इलाज के लिए करीब 35.82 करोड़ रुपये की अत्याधुनिक सीनियर एक्सीलेटर मशीन अगले हफ्ते पहुंचने वाली है लेकिन उसके लिए आवश्यक बिजली कनेक्शन की व्यवस्था अब तक नहीं हो पाई है।
विदर्भ के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर हाई कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका स्वीकार की है। सुनवाई के दौरान अस्पताल में इस मशीन की स्थापना में आ रही इस गंभीर बाधा का खुलासा हुआ।
सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल के कैंसर अस्पताल में स्थापित की जाने वाली इस मशीन को चलाने के लिए लगभग 1 मेगावाट बिजली आपूर्ति की आवश्यकता है। मशीन के लिए आवश्यक बंकर का निर्माण नागपुर महानगर प्रदेश विकास प्राधिकरण (NMRDA) द्वारा पूरा कर लिया गया है।
हालांकि मूल निर्माण प्रस्ताव में मेगावाट क्षमता के बिजली सब स्टेशन और पावर लाइन बिछाने का कोईप्रावधान ही नहीं रखा गया था। इस लापरवाही के कारण अब बिजली कनेक्शन प्राप्त करने के लिए मेडिकल प्रशासन पर 2.75 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
अदालत में सुनवाई के दौरान न्याय मित्र ईशा ठाकरे ने न्यायालय से अनुरोध किया कि राज्य सरकार, एनएमआरडीए, और महावितरण को वर्तमान स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए जाएं तथा NMRDA व नागपुर महावितरण को इस याचिका में प्रतिवादी के रूप में शामिल करने की अनुमति दी जाए।
उच्च न्यायालय ने इस प्रार्थना को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दी। उल्लेखनीय है कि इस अत्याधुनिक उपकरण को स्थापित करने की प्रक्रिया पिछले 6 वर्षों से रुकी हुई है।
महाराष्ट्र राज्य सरकार ने वर्ष 2018 में मशीन की खरीद के लिए 23.20 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी परंतु विभिन्न कारणों से खरीद प्रक्रिया में विलंब होता रहा। इस देरी के कारण सीमा शुल्क सहित मशीन की कीमत बढ़कर लगभग 48 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी।