

Nagpur Electricity Supply: नागपुर महावितरण के ठेकेदारों ने अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले 2 वर्षों (वित्त वर्ष 2024-25 व 2025-26) से उनके करीब 40 करोड़ रुपये के बिल जानबूझकर बजट के नाम पर अटकाये जा रहे हैं। बिलों का भुगतान नहीं होने से ठेकेदारों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।
परेशान ठेकेदारों ने इसके विरोध में 1 जुलाई से काम बंद हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया है। ठेकेदारों की हड़ताल से ऑपरेशंस व मेंटेनेंस के कार्य पर ब्रेक लग सकता है। इससे मानसून के सीजन में दिक्कतें बढ़ सकती हैं। इससे लोगों की परेशानी भी बढ़ सकती है।
दि नागपुर इलेक्ट्रकल कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल मानापुरे के अनुसार पिछले 2 वर्षों से बजट के नाम पर बिल के लिए झुलाया जा रहा है। इसके लिए हम ठेकेदारों ने मुख्य कार्यालय में जाकर वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की जहां अधिकारियों ने बताया कि बजट के लिए एक नई प्रणाली लाए हैं। इस तकनीकी प्रणाली के माध्यम से हम बजट देंगे, बजट देना तो दूर अब तक यह प्रणाली ही लागू नहीं की गई।
इसके चलते बिल का इंतजार लंबा होता जा रहा है। वहीं (एमएसईडीसीएल) महावितरण कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन के चेयरमैन रमेश कनौजिया ने बताया कि मुंबई के मुख्य कार्यालय में बुलाकर हम लोगों को प्रणाली के बारे में समझाया और बिल क्लीयर करने की बात की गई थी जिसके माध्यम से मात्र लॉलीपॉप देने का काम किया गया। वहीं 1 अप्रैल से 15 मई तक का बजट लगाकर पेमेंट देने की तिथि भी चली गई लेकिन
भुगतान नहीं किया।
इसे देखते हुए हमने महावितरण के मुख्य अभियंता राजेश नाईक से मुलाकात कर उन्हें 24 जून से हड़ताल की जानकारी दी थी लेकिन उन्होंने इस समस्या को हल करने का आश्वासन दिया था जिसके चलते हड़ताल टाल दी गई परंतु 30 जून तक हम लोगों के बिलों को भुगतान नहीं किया गया तो 1 जुलाई से पूरे विदर्भ के ठेकेदार अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता अपनाया जायेगा। इससे महावितरण के रखरखाव एवं अन्य कार्य प्रभावित होने की संभावना है।
कनौजिया ने बताया कि इस समस्या को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को भी ज्ञापन सौंपा गया था जिसे रिमार्क करते हुए उन्होंने अधिकारियों को इसे देखने का कहा था लेकिन इसके बाद भी अधिकारियों ने इस पर कुछ नहीं किया।
इस तरह से उन्होंने मुख्यमंत्री के आदेश की भी धज्जियां उड़ा दी। हम लोगों को वार्षिक ऑर्डर तो दिया जाता है परंतु बजट नहीं दिया जा रहा है। वहीं दबाव डालकर काम कराया जा रहा है। हम लोग लोगों की सेवा को देखते हुए काम कर रहे हैं लेकिन अधिकारियों द्वारा इसका गलत फायदा उठाया जा रहा है। इस पर सरकार को तुरंत हस्तक्षेप कर हम लोगों को न्याय दिलाना चाहिए।