नागपुर के सब्जी बाजार में प्यासे लोग, सीमेंट सड़क बनी, लेकिन पानी नहीं; महात्मा फुले बाजार की बदहाल तस्वीर
Nagpur Drinking Water Crisis: नागपुर के महात्मा फुले सब्जी बाजार में हजारों लोगों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। मूलभूत सुविधाओं के अभाव से दुकानदार, मजदूर और ग्राहक परेशान हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
पेयजल संकट, महात्मा फुले बाजार,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Drinking Civic Issues: नागपुर मनपा प्रशासन के दावों के बीच शहर का ऐतिहासिक महात्मा फुले सब्जी बाजार कॉटन मार्केट में पीने के पानी के लिए दुकानदारों से लेकर मजदूरों और ग्राहकों को भटकना पड़ रहा है। बार-बार बाजार में पर्याप्त मूलभूत सुविधाओं की मांग के बावजूद प्रशासन का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। पानी की व्यवस्था नहीं होने से लोगों को खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है। वहीं दुकानदारों को भी रोजाना पानी की केन खरीदनी पड़ रही है।
सबसे ज्यादा तकलीफ मजदूरों और ग्राहकों हो रही है, जब उन्हें प्यास बुझाने के लिए पानी नहीं मिल पता है। हालांकि सीमेंटीकरण होने से बारिश के दिनों में भी यहां होने वाली पुरानी समस्या से लोगों को राहत मिली है लेकिन नियमित सफाई व्यवस्था का अब भी अभाव है।
महात्मा फुले सब्जी व फल आढ़तिया एसोसिएशन के अनुसार हर दिन यहां दुकानदारों, हमाल सहित ग्राहकों को मिलाकर करीब 10,000 लोगों की आवाजाही रहती है लेकिन इनके लिए पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। कभी शहर की आन-बान-शान रहा यह बाजार आज बुनियादी सुविधाओं की बड़ी किल्लत का सामना कर रहा है।
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रोजाना सजती हैं 290 से अधिक दुकानें
करीब 13 एकड़ के विशाल परिसर में फैले महात्मा फुले बाजार में सब्जियों की 290 अधिकृत दुकानें सजती हैं, जबकि फलों का कारोबार खुले मैदान में होता है। वर्ष 2009 में इस मार्केट के संचालन का जिम्मा कृषि उत्पन्न बाजार समिति से छीनकर मनपा प्रशासन के हाथों में आ गया था। कृषि उत्पन्न बाजार समिति के कलमना शिफ्ट होने के बाद नागपुर महानगरपालिका ने यहां का सीमेंटीकरण कराया। इससे यहां व्यवसाय को फायदा भी हुआ। पहले जैसी कीचड़ और गंदगी की समस्या अब बारिश में नहीं दिखती है लेकिन पानी की व्यवस्था अब तक नहीं की गई है।
सालों पहले लगाए गए नल अब नहीं रहे
महात्मा फुले सब्जी व फल आढ़तिया एसोसिएशन के सचिव राम महाजन ने कहा कि सालों पहले जब देवेंद्र फडणवीस महापौर थे, तब व्यापारियों की मांग पर यहां कॉर्पोरेशन के नल लगाए गए थे। पीने की पानी की यही एकमात्र व्यवस्था थी लेकिन यह नल बंद पड़े और अब यह भी नहीं रहे।
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आज आलम यह है कि बाजार में काम करने वाले कर्मचारियों, हमालो, तौलने वालों, थ्री-व्हीलर चालकों, कैटरर्स और शहर भर से आने वाले हजारों ग्राहकों को प्यास बुझाने के लिए पानी खरीददना पड़ता है। मनपा प्रशासन को ध्यान देना चाहिए, संगठन कई बार इसके लिए ज्ञापन सौप चुका है।
