
महाराष्ट्र वेदर अपडेट (सौजन्य-IANS)
Maharashtra Weather Update: तापमान में अब गिरावट होने लगी है। तापमान में गिरावट के साथ ही ठंड भी बढ़ गई है। न्यूनतम पारा 14.4 डिग्री पर पहुंच गया है। बीते 2-3 दिनों से शहर में ठंड बढ़ गई है। अब रात के साथ दिन में भी ठंड महसूस हो रही है। रविवार को सुबह से ही मौसम ठंडा रहा।
हालांकि दोपहर के वक्त धूप खिली रही लेकिन इसके बावजूद ठंड महसूस हुई। कई लोगों को दिन के वक्त भी जैकेट और स्वेटर में देखा गया। वहीं रात के वक्त बिना जैकेट के घर से निकलना मुश्किल हो गया है। अब जैकेट बाजार में भी ग्राहकों की भीड़ जमने लगी है। मौसम विभाग ने रविवार को सिटी का अधिकतम तापमान 29.1 डिग्री दर्ज किया।
यह औसत से 2.8 डिग्री कम रहा। शनिवार की तुलना में रविवार को 1.3 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। न्यूनतम तापमान 14.4 डिग्री पर आ गया। यह औसत से 2.5 डिसे कम रहा। बीते 24 घंटों में 1.6 डिग्री की गिरावट आई।
रविवार को पूरे विदर्भ में गोंदिया सर्वाधिक ठंडा दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने गोंदिया का न्यूनतम तापमान 11.5 डिग्री दर्ज किया। वहीं भंडारा 12.0 डिग्री, अमरावती 12.5 डिग्री, वाशिम 12.6 डिसे, यवतमाल 13.0 डिग्री, बुलढाना 13.8 डिसे, गड़चिरोली 14.2 डिग्री, अकोला 14.3 डिसे, वर्धा 14.8 डिग्री, ब्रह्मपुरी 15.4 डिसे और चंद्रपुर का न्यूनतम तापमान 16.8 डिसे दर्ज किया गया।
मौसम में अचानक परिवर्तन के कारण संक्रामक जैसी बीमारियों ने अपना सिर उठा लिया है। संक्रामक की शुरुआत के साथ, नागरिक बीमार हो गए और ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़ों की मांग बढ़ गई। पिछले कुछ दिनों से मौसम लगातार बदल रहा है। कभी ठंड तो कभी शुष्क हवा के कारण तरह तरह की बीमारियों ने सिर उठाया है।
जहां वायरल बुखार और सर्दी, खांसी की शिकायतें बढ़ रही हैं, वहीं संक्रामक संबंधी बीमारियां भी बढ़ रही हैं। घर-घर सर्दी, खांसी और बुखार के मरीज मिल रहे हैं। निजी अस्पतालों के साथ-साथ सरकारी अस्पताल भी मरीजों से फुल हो गए हैं। मौसम लगातार बदल रहा है, इसलिए हर व्यक्ति के शरीर के लिए इस वातावरण के अनुकूल ढलना आसान नहीं है।
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छोटे बच्चे, बुजुर्ग और कमजोर लोग संक्रामक बीमारी के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। जिन लोगों को पहले से ही श्वसन संबंधी विकार हैं, वे इस वातावरण से अधिक प्रभावित होते हैं। गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, ग्रामीण अस्पतालों और निजी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बड़े पैमाने पर दिखाई दे रही है। इसके साथ आने वाली सर्दी, खांसी और बुखार का इलाज समय पर नहीं होता है और बुखार बार-बार होता है। बीमार मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण देखा जा रहा है कि ग्रामीण अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
ठंड के मौसम श्वसन के कारण शुष्क हवा अंदर जाती है। इसका असर फेफड़ों पर पड़ता है। ठंड से गले में खराश, गले में इन्फेक्शन जैसी बीमारियां होती हैं। यहीं से श्वसन रोग की शुरुआत होती है। इस वातावरण से अस्थमा के मरीजों को अधिक परेशानी होती है, ऐसी विपरीत परिस्थितियों में समय रहते कदम उठाना जरूरी है।
डॉक्टरों के अनुसार नियमित सुबह-शाम टहलना, व्यायाम करना, एक बार में कुछ न खाकर चार से पांच बार थोड़ा-थोड़ा भोजन करना, रोजाना तीन से चार लीटर पानी पीना, रोजाना एक फल और सूखे मेवे खाना जरूरी है, इस दौरान अधिक बार भूखा रहना हानिकारक होता है। नियमित रूप से स्वस्थ आहार लेने और हाथ-पैर धोने की सलाह विशेषज्ञों नेदी है।






