स्टाफ अप्रूवल के नए नियमों पर बवाल, शिक्षक संगठनों ने जताई आपत्ति; 120 छात्रों की शर्त बनी परेशानी
Nagpur Saral Portal: सरल पोर्टल से ऑनलाइन स्टाफ अप्रूवल की नई व्यवस्था और कड़े नियमों के कारण राज्यभर में हजारों शिक्षकों के अतिरिक्त घोषित होने की आशंका बढ़ गई है।
- Written By: अंकिता पटेल
सरल पोर्टल, स्टाफ अप्रूवल, शिक्षक अतिरिक्त,(प्रतीकात्मक तस्वीर सोर्स: एआई फोटो)
Nagpur Saral Portal Staff Approval: नागपुर शालेय शिक्षा विभाग द्वारा निजी अनुदानित प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों की स्टाफ स्वीकृति (स्टाफ अप्रूवल) प्रक्रिया इस वर्ष पहली बार सरल पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन की जा रही है। नई व्यवस्था में लागू की गई तकनीकी खामियों और कड़े नियमों के कारण राज्यभर में हजारों शिक्षकों के अतिरिक्त घोषित होने की संभावना बढ़ गई है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि इन प्रावधानों का सबसे अधिक असर वरिष्ठ महाविद्यालयों से संबद्ध कनिष्ठ महाविद्यालयों पर पड़ रहा है। नई व्यवस्था के तहत वरिष्ठ महाविद्यालय से संबद्ध कनिष्ठ महाविद्यालयों में एक कक्षा के लिए न्यूनतम 120 विद्यार्थियों की अनिवार्यता तय की गई है, जबकि माध्यमिक विद्यालय से संबद्ध एवं स्वतंत्र कनिष्ठ महाविद्यालयों के लिए यह संख्या 80, ग्रामीण क्षेत्रों में 60 तथा आदिवासी क्षेत्रों में 40 निर्धारित की गई है।
शिक्षक संगठनों का तर्क है कि विद्यार्थियों की संख्या अलग-अलग होने के बावजूद सभी शिक्षकों का अध्यापन कार्यभार समान रखा गया है, जो पूरी तरह असंगत है। वरिष्ठ महाविद्यालयों से जुड़े कई पुराने कनिष्ठ महाविद्यालयों में कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय की कई अनुदानित कक्षाएं संचालित हैं लेकिन वर्षों में बड़ी संख्या में बिना अनुदान वाले कनिष्ठ महाविद्यालय खुलने से इन संस्थानों में प्रवेश घटा है।
सम्बंधित ख़बरें
मुंबई के ओशिवारा में खौफनाक वारदात, पति ने पहले पत्थर से कुचला, फिर चाकू से रेता पत्नी का गला
मुंबई मोनोरेल को मिली नई रफ्तार, नए कोच का ट्रायल सफल, जल्द यात्रियों की सेवा में होगा शामिल
बदलेगी नागपुर कलमना मंडी की सूरत: भीषण गर्मी से राहत के लिए लगेंगे टर्बो वेंटिलेटर, होगा भव्य सौंदर्यीकरण
नागपुर ड्रेनेज लाइन विवाद में हाई कोर्ट का बड़ा कदम; मौके के मुआयने के लिए नियुक्त किया कोर्ट कमिश्नर
इसके बावजूद 120 विद्यार्थियों की अनिवार्य सीमा के कारण कई अनुदानित कक्षाएं स्टाफ स्वीकृति में मान्य नहीं हो पा रही हैं, जिससे इनके अतिरिक्त घोषित होने का खतरा पैदा हो गया है।
साइंस टीचर्स का कार्यभार कम
उदाहरण के तौर पर यदि किसी महाविद्यालय में विज्ञान संकाय की तीन अनुदानित कक्षाओं की क्षमता 360 विद्यार्थियों की है और प्रवेश 295 हुए हैं, तो 120 120 विद्यार्थियों वाली केवल दो कक्षाएं ही मान्य मानी जाएंगी। शेष 55 विद्यार्थियों को किसी भी कक्षा की गणना में शामिल नहीं
किया जाएगा।
परिणामस्वरूप उन विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षकों का कार्यभार भी मान्य नहीं होगा। संगठनों ने यह भी कहा कि वरिष्ठ महाविद्यालय से संबद्ध कनिष्ठ महाविद्यालयों का संचालन पूरी तरह स्कूल शिक्षा विभाग के नियमों के अनुसार होता है।
इसलिए उन्हें स्वतंत्र कनिष्ठ महाविद्यालय का दर्जा दिया जाना चाहिए, इससे प्रत्येक कक्षा की छात्र संख्या 120 के बजाय 80 मानी जाएगी और शिक्षकों के पद सुरक्षित रह सकेंगे।
यह भी पढ़ें:-बदलेगी नागपुर कलमना मंडी की सूरत: भीषण गर्मी से राहत के लिए लगेंगे टर्बो वेंटिलेटर, होगा भव्य सौंदर्यीकरण
कार्यभार नियमों में बदलाव
- विज्ञान संकाय में भी इस वर्ष कार्यभार निर्धारण के नियमों में बदलाव किया गया है।
- पहले प्रयोगशाला कार्य के लिए 20 विद्यार्थियों का एक बैच माना जाता था, जबकि अब 40 विद्यार्थियों का एक बैच निर्धारित किया गया है। इससे विज्ञान विषयों के शिक्षकों का कार्यभार भी कम हो रहा है।
