रामदास आठवले, विनोद तावड़े, माया ईवनाते व रामराव वडकुते (सोर्स: सोशल मीडिया)
BJP Rajya Sabha Candidates Political Career: भारतीय जनता पार्टी ने महाराष्ट्र से राज्यसभा की खाली हो रही सीटों के लिए अपने पत्ते खोल दिए हैं। पार्टी ने इस बार ‘पुराने वफादारों’ और ‘जातीय संतुलन’ का एक ऐसा कॉकटेल तैयार किया है, जिसने राजनीतिक विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है। सूची में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले और राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े जैसे कद्दावर नामों के साथ-साथ आदिवासी और ओबीसी चेहरों को जगह दी गई है।
बीजेपी की लिस्ट में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद, माया ईवनाते व रामराव वडकुते का नाम शामिल है। आइए जानते हैं इन चार दिग्गजों के बारे में व इनके चयन के पीछे के सियासी मायने क्या है।
विनोद तावड़े का नाम इस सूची में सबसे अहम है। महाराष्ट्र की राजनीति से दिल्ली की राजनीति तक, तावड़े का सफर काफी उतार-चढ़ाव वाला रहा है। मूलतः कोंकण क्षेत्र मुंबई के गिरगांव से आने वाले तावड़े के राजनीतिक करियर की शुरुआत अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से हुई। वे महाराष्ट्र में शिक्षा और सांस्कृतिक मंत्री रह चुके हैं। 2019 में टिकट कटने के बाद वे हाशिए पर दिखे थे, लेकिन संगठन में शानदार काम कर वे राष्ट्रीय महासचिव बने रहे।
विनोद तावड़े को संगठन का आदमी माना जाता है। वे वर्तमान में बीजेपी हाईकमान यानी अमित शाह और जेपी नड्डा के बेहद भरोसेमंद ‘संकटमोचक’ बनकर उभरे हैं। तावड़े को राज्यसभा भेजकर बीजेपी ने मराठा और शहरी मध्यम वर्ग को साधने की कोशिश की है।
रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (A) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री आठवले, बीजेपी के सबसे पुराने और वफादार सहयोगियों में से एक हैं। दलित पैंथर आंदोलन से उभरे आठवले 3 बार लोकसभा सांसद रहे और वर्तमान में केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री हैं। अब वे तीसरी बार राज्यसभा जाएंगे। आठवले को फिर से मौका देकर बीजेपी ने महाराष्ट्र के दलित (विशेषकर बौद्ध) वोट बैंक को अपने साथ जोड़े रखने का संदेश दिया है।
माया ईवनाते का नाम इस सूची का ‘सरप्राइज एलिमेंट’ है, जो बीजेपी की अंत्योदय की राजनीति को दर्शाता है। मायाताई ईवनाते को BJP की बहुत पढ़ी-लिखी और एक्टिव लीडर माना जाता है। वह नागपुर की मेयर भी रह चुकी हैं और उन्हें स्थानीय राजनीति का खासा अनुभव है। वह ‘राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग’ (NCST) की पहले सदस्य भी रह चुकी हैं। इस पद पर रहते हुए उन्हें दिल्ली में मिनिस्टर ऑफ़ स्टेट का दर्जा दिया गया था।
चर्चा है कि BJP ने उन्हें तीनों बातों महिला लीडरशिप, आदिवासी चेहरा और विदर्भ में रिप्रेजेंटेशन को ध्यान में रखकर नॉमिनेट किया है। मायाताई का आदिवासी समाज में बहुत असर है और नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल्ड ट्राइब्स में उनके काम की वजह से उन्हें दिल्ली में काम करने का अच्छा अनुभव है।
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रामराव वडकुते महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य (MLC) रह चुके हैं। व ‘धनगर’ समुदाय से आते हैं। मराठवाड़ा में धनगर आरक्षण की मांग के बीच उन्हें राज्यसभा भेजना बीजेपी का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक है। उन्हें उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का करीबी माना जाता है।
रामराव वडकुते पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता थे। 2019 में विधानसभा चुनाव के लिए टिकट नहीं मिलने के कारण उन्होंने एनसीपी छोड़ दी और विधान परिषद से इस्तीफा देकर BJP में शामिल हो गए। रामराव वडकुते ने हिंगोली विधानसभा से टिकट पाने की कोशिश की थी। हालांकि, उन्हें नॉमिनेशन नहीं मिला। इस वजह से वे परेशान थे। इस बीच, वडकुते पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी महाराष्ट्र भेड़ और बकरी विकास निगम के अध्यक्ष रह चुके हैं। वे शुरू से ही परभणी जिले में धनगर मुद्दों के लिए एक्टिव रहे हैं। उसके बाद, वे हिंगोली जिले की कलमनुरी विधानसभा इलाके में काम किया।