सालों का इंतजार व एक दिन का हाहाकार: RTO दफ्तरों में कामकाज पूरी तरह ‘क्रैश’, जनता को मिली सिर्फ मानसिक यातना
Nagpur RTO Strike: पदोन्नति और सेवा संबंधी मांगों को लेकर महाराष्ट्र भर के आरटीओ कर्मचारियों ने एक दिवसीय हड़ताल की। सेवाएं प्रभावित रहीं और मांगें पूरी नहीं होने पर 16 जून से आंदोलन की चेतावनी दी गई।
- Written By: अंकिता पटेल
आरटीओ हड़ताल, महाराष्ट्र, पदोन्नति, कर्मचारी आंदोलन,(सोर्स: नवभारत फाइल फोटो)
Nagpur RTO Strike Promotion Issue: लंबे समय से लंबित पदोन्नति के मुद्दों और अन्य सेवा-संबंधी मांगों को लेकर नागपुर सहित पूरे महाराष्ट्र के क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) के कर्मचारियों ने सोमवार को एक दिवसीय के हड़ताल की। इस आंदोलन कारण आरटीओ की नियमित सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई जिससे विभिन्न परिवहन कार्यों के लिए दफ्तर पहुंचे नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और कई लोगों को बिना काम कराए ही वापस लौटना पड़ा।
उनका कहना है कि अगर मांगें नहीं मांगी गई तो 16 जून से अनिश्चितकालीन हड़ताल करेंगे। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों का आरोप है कि कई अधिकारी और स्टाफ सदस्य पात्रता रखने के बावजूद सालों से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं।
पहले प्रमोशन दिया, फिर लिया वापस
नागपुर सिटी आरटीओ के क्लर्क-कम-टाइपिस्ट मंगेश कड़ ने बताया कि कर्मचारियों ने बार-बार अधिकारियों के सामने अपनी चिंताएं उठाईं लेकिन उन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि पिछले परिवहन आयुक्त द्वारा मंजूर किए गए प्रमोशन को नए आयुक्त ने कार्यभार संभालने के बाद रद्द कर दिया जिससे कर्मचारियों में भारी निराशा है।
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56 कार्यालयों में कामकाज पूरी तरह बंद
मंगेश कड़ ने दावा किया कि महाराष्ट्र भर के सभी 56 आरटीओ कार्यालयों ने इस हड़ताल में भाग लिया, जबकि नागपुर में लगभग 150 कर्मचारी इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए, एक अन्य प्रदर्शनकारी प्रशांत रामटेके ने निचले स्तर के कर्मचारियों के सामने आने वाली वित्तीय और व्यक्तिगत चुनौतियों को रेखांकित किया। उन्होंने सवाल उठाया कि 30,000 से 40,000 रुपये प्रति माह कमाने वाला एक कर्मचारी उन अधिकारों को पाने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई का खर्च कैसे उठा सकता है जो पहले से ही उचित प्रशासनिक माध्यमों से स्वीकृत हो चुके थे।
