गोंदिया RTO सेवाओं पर संकट के आसार, कर्मचारियों ने ‘चक्का जाम’ आंदोलन का किया ऐलान

RTO Employees Strike: गोंदिया के आरटीओ कर्मचारियों ने लंबित मांगों और पदोन्नति रद्द होने के विरोध में एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की। समाधान न होने पर 16 जून से चक्का जाम की चेतावनी दी है।
Gondia RTO Employees Strike
हड़ताल प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स - सोशल मिडिया)
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Maharashtra Transport Staff Protest: महाराष्ट्र के मोटर वाहन विभाग (RTO) और राज्य सरकार के बीच का टकराव अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अपनी विभिन्न प्रलंबित और जायज मांगों को लेकर गोंदिया जिले के आरटीओ कर्मचारियों ने मंगलवार को कार्यालय के समक्ष खड़े होकर एक दिवसीय सांकेतिक हड़ताल की और सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।

कर्मचारियों ने स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ एक चेतावनी थी, और यदि सरकार ने उनकी समस्याओं का तुरंत ठोस समाधान नहीं निकाला, तो आगामी 16 जून से पूरे सूबे में अनिश्चितकालीन हड़ताल यानी 'चक्का जाम' आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। इस आंदोलन के कारण आम जनता से जुड़ी वाहन लाइसेंस, नए वाहनों का रजिस्ट्रेशन और टैक्स भुगतान जैसी सभी महत्वपूर्ण सेवाएं पूरी तरह ठप होने की आशंका है।

सेवा नियमावली में देरी से भारी आर्थिक नुकसान

संगठन द्वारा जारी किए गए पत्र के अनुसार, सरकार ने 23 सितंबर 2022 को ही प्रवेशोत्तर नियमों के लंबित रहने के कारण विभाग के कृतिबंध को मंजूरी दे थी। लेकिन, प्रशासनिक सुस्ती और लालफीताशाही के चलते इतने वर्ष बीतने के बाद भी आज तक आवश्यक प्रवेशोत्तर सेवा नियमावली तैयार नहीं की जा सकी है। नियमों के स्पष्ट न होने का खामियाजा सीधे तौर पर कार्यरत कर्मचारियों को भुगतना पड़ रहा है, जिससे उन्हें हर महीने भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

56 कर्मचारियों के डिमोशन से भड़का गुस्सा

कर्मचारियों के इस सामूहिक आक्रोश का एक और बड़ा कारण विभाग के 56 कर्मचारियों की प्रमोशन को अचानक रद्द करना है। विभाग ने इन 56 कर्मियों की पदोन्नति को निरस्त कर उन्हें सीधे डिमोशन कर दिया है, जिससे RTO अमले में गहरा असंतोष व्याप्त है। कर्मचारी संगठन लगातार समयबद्ध पदोन्नति, सुनिश्चित प्रगति योजना का लाभ देने, द्वितीय श्रेणी प्रशासनिक अधिकारी के पदों को भरने के साथ-साथ प्रतिनियुक्ति पर न्यायसंगत स्थानांतरण जैसी कई मांगें दोहरा रहा है।

इस सुलगते विवाद को शांत करने के लिए बीते 3 जून को राज्य परिवहन मंत्री प्रतापराव सरनाईक की उपस्थिति में संगठन के पदाधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई गई थी। परंतु, संगठन का सीधा आरोप है कि इस बैठक में सकारात्मक रुख अपनाने के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों ने फिर से कुछ पेचीदा तकनीकी मुद्दे खड़े कर दिए और मामले को जानबूझकर आगे के लिए टाल दिया। प्रशासन के इसी टालमटोल वाले रवैये से नाराज होकर कर्मचारियों ने अब 16 जून से दफ्तरों पर ताला लगाकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का अंतिम फैसला लिया है।

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