महाराष्ट्र में मराठी अनिवार्यता पर सख्ती: इंग्लिश मीडियम स्कूलों की होगी कड़ी जांच, एक्शन मोड में सरकार
Marathi Language Mandatory: महाराष्ट्र में मराठी भाषा को अनिवार्य बनाने के नियम के पालन की जांच शुरू होगी। शिक्षा विभाग की टीमें इंग्लिश मीडियम स्कूलों में भी मराठी पढ़ाई की स्थिति की समीक्षा करेंगी।
- Written By: अंकिता पटेल
मराठी अनिवार्य शिक्षा( सोर्स: सोशल मीडिया )
Maharashtra School Policy: नागपुर राज्य में मराठी भाषा को अनिवार्य रूप से लागू करने के मामले में अब सरकार पूरी तरह सख्त नजर आ रही है। इंग्लिश मीडियम स्कूलों में मराठी पढ़ाई जा रही है या नहीं, इसकी व्यापक और कड़ी जांच जल्द शुरू की जाएगी।
शिक्षा विभाग ने इसके लिए पूरी तैयारी कर ली है और अधिकारियों की विशेष टीमों को मैदान में उतारने का निर्णय लिया गया है। प्रादेशिक स्तर से लेकर गटशिक्षणाधिकारी स्तर तक के अधिकारी इस अभियान में शामिल होंगे, जिससे स्कूलों की प्रभावी जांच संभव हो सकेगी।
दरअसल, राज्य सरकार ने वर्ष 2020 में एक महत्वपूर्ण अधिनियम लागू कर पहली से दसवीं कक्षा तक सभी स्कूलों में मराठी भाषा का अध्ययन और अध्यापन अनिवार्य कर दिया है।
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इसके बाद 1 जून 2020 को जारी शासन निर्णय के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2020-21 से इस नियम को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया। सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है कि राज्य के प्रत्येक छात्र को मराठी भाषा का ज्ञान सुनिश्चित करना, चाहे वह किसी भी माध्यम या बोर्ड से शिक्षा ग्रहण कर रहा हो।
शिक्षा आयुक्त को मिले विशेष अधिकार
नई व्यवस्था के तहत मराठी भाषा का अध्यापन नहीं करने वाले स्कूलों के खिलाफ सीधे कार्रवाई करने का अधिकार शिक्षा आयुक्त को दे दे गए हैं। यानी अब कार्रवाई की प्रक्रिया और भी तेज और प्रभावी होने वाली है।
इसके साथ ही सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मराठी विषय के लिए पात्र और प्रशिक्षित शिक्षकों की नियुक्ति सुनिश्चित करें। बिना योग्य शिक्षक के मराठी पढ़ाने में लापरवाही भी कार्रवाई का कारण बन सकती है।
मराठी विषय नहीं पढ़ाने की शिकायतें
यदि कोई स्कूल इस अधिनियम का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उस पर १ लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इतना ही नहीं, संबंधित स्कूल की मान्यता और अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) को भी रद्द किया जा सकता है।
हाल के दिनों में कुछ निजी इंग्लिश मीडियम स्कूलों में मराठी विषय नहीं पढ़ाए जाने की शिकायतें सामने आई थीं। इसके बाद स्कूल शिक्षा विभाग ने अब कार्रवाई की स्पष्ट कार्यप्रणाली तय कर दी है।
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विशेष टीमें, केंद्र प्रमुख भी होंगे शामिल
निजी स्कूलों की जांच के लिए विशेष टीमों का गठन किया जाएगा, शिक्षा विभाग के प्रादेशिक अधिकारियों के अलावा जल्द ही केंद्र प्रमुख पद पर नियुक्त होने वाले शिक्षक भी इस अभियान में शामिल किए जाएंगे, ये टीमें सीधे स्कूलों में जाकर यह जांच करेंगी कि पहली से दसवीं कक्षा तक मराठी भाषा का वास्तविक रूप से अध्यापन हो रहा है या नहीं, केवल कागजों में दिखावा करने वाले स्कूलों पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी।
