Maharashtra: जन सुरक्षा कानून लागू, जारी हो गया अध्यादेश, कट्टर वामपंथी गतिविधियों पर लगेगी लगाम
Maharashtra Jan Suraksha Kanoon: कट्टर वामपंथी और अवैध गतिविधियों पर रोक के लिए महाराष्ट्र सरकार ने जन सुरक्षा कानून लागू किया। इसके लिए अध्यादेश भी जारी कर दिया गया है।
- Written By: प्रिया जैस
सीएम देवेंद्र फडणवीस (सौजन्य-IANS)
Public Safety Law Maharashtra: कट्टर और वामपंथी विचारधारा से जुड़ी अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने जन सुरक्षा कानून लागू किया है। इस कानून पर कई संगठनों ने आपत्ति दर्ज कराई थी। अध्यादेश जारी कर कानून को लागू कर दिया गया है। शीतकालीन अधिवेशन समाप्त होते ही इस संबंध में विधि एवं न्याय विभाग के सचिव सतीश वाघोले के नाम से अध्यादेश जारी किया गया।
इस कानून के मसौदे को 10 दिसंबर को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। इसके अनुसार सड़क, रेल, हवाई और जलमार्ग के परिवहन में बाधा उत्पन्न करने पर भी कार्रवाई की जाएगी। दोषी को 2 से 7 वर्ष तक का कारावास तथा 2 से 5 लाख रुपये तक का जुर्माना का प्रावधान है।
क्या है कानून?
इसी तरह अवैध गतिविधियों के लिए धन एकत्र करना या सामग्री जुटाना, चाहे वह मौखिक, लिखित, संकेतों के माध्यम से या दृश्य प्रस्तुति के जरिए हो, इन सभी मामलों में कार्रवाई की जाएगी। सार्वजनिक शांति भंग करने वाले संगठनों के सदस्यों को 3 वर्ष तक का कारावास और 3 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। अवैध संगठनों की मदद करने वालों को भी कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।
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यदि कोई व्यक्ति सदस्य नहीं है लेकिन किसी भी प्रकार से चंदा स्वीकार करता है, मदद करता है या आश्रय देता है तो उसे 2 वर्ष का कारावास और 2 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। सरकार ने राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने व नागरिकों के लिए शांतिपूर्वक और सुरक्षित जीवन सुनिश्चित करने के लिए यह कानून लाया है।
संगठन को अवैध घोषित करने का अधिकार
किसी संगठन की गतिविधियों की जांच कर उसे अवैध घोषित करने का अधिकार सरकार का है। संबंधित संगठन को इस बारे में लिखित सूचना दी जाएगी। संगठन को 15 दिनों के भीतर सरकार के समक्ष अपना पक्ष प्रस्तुत करना होगा। इस पर सलाहकार समिति द्वारा सुनवाई की जाएगी।
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इसमें सरकार द्वारा 3 सदस्यों की नियुक्ति की जाएगी। इसमें एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश या पूर्व न्यायाधीश अध्यक्ष होंगे। 2 सदस्यों में एक सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश और दूसरा उच्च न्यायालय का सरकारी वकील होगा। यह समिति सुनवाई कर 3 माह के भीतर अपनी रिपोर्ट देगी। अवैध गतिविधियों के लिए उपयोग की गई जमीन को जिलाधिकारी या पुलिस आयुक्त कब्जे में लेंगे।
