संपत्ति कर (सौजन्य-सोशल मीडिया)
CM Samriddh Panchayat Abhiyan: मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायत राज अभियान के तहत ग्रामीण नागरिकों को दी जा रही कर राहत योजना अब बंद कर दी गई है। इसके चलते अब ग्रापं क्षेत्र के नागरिकों को आवासीय संपत्ति कर, जल कर और प्रकाश कर सहित सभी बकाया करों का 100 प्रतिशत भुगतान करना होगा। कर छूट समाप्त होने से ग्रामीण क्षेत्रों में तीव्र असंतोष और आक्रोश देखा जा रहा है।
इस अभियान के अंतर्गत यदि नागरिक ग्रापं के आवासीय संपत्ति कर एवं अन्य करों की बकाया राशि का 50 प्रतिशत भुगतान करते थे, तो उन्हें कुल बकाया पर 50 प्रतिशत की छूट दी जाती थी। यह योजना 31 दिसंबर तक लागू थी। हालांकि ग्रामीण स्तर पर समुचित प्रचार-प्रसार न होने के कारण अधिकांश नागरिकों को इसकी जानकारी समय पर नहीं मिल सकी, जिसके चलते वे तय अवधि में कर जमा नहीं कर पाए।
अब सरकार ने इस अभियान को केवल 31 मार्च तक बढ़ाया है, लेकिन इसमें किसी भी प्रकार की कर छूट शामिल नहीं की गई है। परिणामस्वरूप नागरिकों को पूरा कर भरना अनिवार्य हो गया है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
सरकार ने ग्राम पंचायतों की आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने, गांवों के विकास तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायत राज अभियान लागू किया था। लेकिन अभियान के दौरान यह सामने आया कि कई ग्राम पंचायतों में कर वसूली लंबित थी और नियमों के अनुसार 100 प्रतिशत कर संग्रह नहीं हो पा रहा था। इससे ग्राम पंचायतों को बुनियादी सुविधाएं देने और नए विकास कार्य शुरू करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।
इसी पृष्ठभूमि में, ग्राम पंचायतों को बकाया वसूली में तेजी लाने के लिए एक लाख रुपये तक के बकाया पर 50 प्रतिशत की छूट देने तथा वसूली गई राशि को विकास कार्यों में खर्च करने की अनुमति दी गई थी, बशर्ते कि 1 अप्रैल 2025 से पहले बकाया का 50 प्रतिशत चालू वर्ष के आवासीय संपत्ति कर, जल कर एवं प्रकाश कर के साथ जमा किया जाए। हालांकि जिले में यह अभियान प्रभावी रूप से लागू नहीं हो सका।
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नियमों के अनुसार ग्राम पंचायतों को कर छूट लागू करने के लिए विशेष ग्राम सभा बुलाकर बहुमत से प्रस्ताव पारित करना आवश्यक था। हालांकि तहसील की कुछ ग्राम पंचायतों ने यह प्रक्रिया अपनाई, लेकिन कई ग्राम पंचायतों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया और न ही विशेष ग्राम सभा आयोजित की। इसके कारण बड़ी संख्या में नागरिक इस कर राहत से वंचित रह गए।
कर छूट केवल आवासीय संपत्ति मालिकों के लिए थी, जबकि औद्योगिक और वाणिज्यिक संपत्तियों को इससे बाहर रखा गया था, जिस पर पहले से ही असंतोष व्यक्त किया जा रहा था। अब जबकि अभियान की अवधि बढ़ा दी गई है, ग्राम पंचायत स्तर पर नागरिकों को यह कहकर छूट से वंचित किया जा रहा है कि कोई आदेश लागू नहीं है। इस स्थिति से नाराज नागरिकों ने मांग की है कि बढ़ाई गई अवधि में भी पूर्व की तरह 50 प्रतिशत कर छूट लागू की जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके और सरकार के प्रति विश्वास बना रहे।