प्राध्यापकों की भर्ती (AI Generated Image)
Nagpur University Faculty Vacancy: राज्य के सार्वजनिक विश्वविद्यालयों से संबद्ध तथा उच्च शिक्षण संचालनालय के अधीन मान्यता प्राप्त अनुदानित महाविद्यालयों में प्राध्यापक भर्ती को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। सहायक प्राध्यापक संवर्ग के रिक्त पदों में से 5,012 पदों पर भर्ती को मंजूरी प्रदान की गई है।
नागपुर विभाग के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विवि और गोंडवाना विवि के अंतर्गत महाविद्यालयों में करीब 700 पदों पर भर्ती की मंजूरी मिल सकती है। इसके साथ ही वर्षों से प्राध्यापकों के अभाव में चल रहे महाविद्यालयों में राहत मिलेगी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रभावी कार्यान्वयन के मद्देनज़र यह निर्णय लिया गया।
स्वायत्त महाविद्यालयों में एनईपी को शैक्षणिक वर्ष 2023-24 से लागू किया गया, जबकि सार्वजनिक विश्वविद्यालयों से संबद्ध अन्य स्नातक एवं स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में इसे शैक्षणिक वर्ष 2024-25 से लागू किया गया। नीति के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा पद भर्ती संबंधी जारी दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए सहायक प्राध्यापक पदों की रिक्तियों को भरना आवश्यक बताया गया है।
इससे पहले वर्ष 2018 और 2019 में 1 अक्टूबर, 2017 की छात्र संख्या के आधार पर निर्धारित कार्यभार को ध्यान में रखते हुए सहायक प्राध्यापक संवर्ग के 3,580 पदों (कुल रिक्त पदों के 40 प्रतिशत) पर भर्ती की अनुमति दी गई थी। उसी के अनुरूप पदभर्ती प्रक्रिया पूरी की गई थी। हालांकि सेवानिवृत्ति, मृत्यु, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और त्यागपत्र जैसे कारणों से बड़ी संख्या में पद पुनः रिक्त हो गए।
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नागपुर सहसंचालक कार्यालय के अंतर्गत नागपुर विवि और गोंडवाना विवि का समावेश है। दोनों विश्वविद्यालयों को मिलाकर अनुदानित महाविद्यालयों की संख्या 196 है। इन महाविद्यालयों में करीब 700 पदों पर नियुक्तियों की उम्मीद है। हालांकि अब तक रिक्त पदों की संख्या निश्चित नहीं की गई है। सहसंचालक कार्यालय के सूत्रों के अनुसार पद निश्चित करने में करीब महीने भर का समय लगेगा।
इसके बाद ही अगली प्रक्रिया शुरू हो सकेगी। अनुदानित महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में प्राध्यापक भर्ती के इस निर्णय का शैक्षणिक क्षेत्र में स्वागत किया गया है। यह भी स्पष्ट किया गया है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया यूजीसी की नियमावली के अनुरूप ही संचालित की जानी चाहिए तथा राज्य सरकार द्वारा उसमें कोई एकतरफा बदलाव नहीं किया जाना चाहिए।