महाराष्ट्र उच्च शिक्षा में बड़ा बदलाव, अनुदानित कॉलेज बनेंगे प्राइवेट यूनिवर्सिटी? सरकार तैयार कर रही नीति
Nagpur Private University Policy: महाराष्ट्र में अनुदानित कॉलेजों को प्राइवेट यूनिवर्सिटी बनाने की नीति पर काम तेज, दो माह में समिति रिपोर्ट देगी, उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी।
- Written By: अंकिता पटेल
अनुदानित कॉलेज, प्राइवेट यूनिवर्सिटी, (सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur Higher Education Reform: नागपुर अनुदानित कॉलेजों को प्राइवेट यूनिवर्सिटी में तब्दील करने को लेकर राज्य सरकार जल्द ही नई नीति तैयार करने जा रही है। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस संबंध में पहल करते हुए एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है जिसे 2 महीने के भीतर रिपोर्ट सौंपने की समय सीमा दी गई है। भविष्य में वे शिक्षा संस्थाएं जिनके पास मल्टीफैकल्टी कॉलेज हैं, वे प्राइवेट यूनिवर्सिटी बन जाएंगे।
नई शिक्षा नीति के तहत उच्च शिक्षा में अनेक बदलाव हो रहे हैं। भविष्य में भी कई बदलाव देखने को मिलेंगे। हालांकि राज्य में इससे पहले प्राइवेट कॉलेज प्राइवेट यूनिवर्सिटी और ऑटोनॉमस बने हैं लेकिन अब सरकार अनुदानित निजी संस्थाओं को भी यूनिवर्सिटी बनने का अवसर देने जा रही है। उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस संबंध में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष डॉ. भूषण पटवर्धन की अध्यक्षता में समिति का गठन किया है।
समिति में उच्च व तकनीकी शिक्षा विभाग के उपसचिव, उच्च्च शिक्षा संचालक और पुणे के विभागीय सहसंचालक को भी शामिल किया गया है। उल्लेखनीय है कि नागपुर विभाग में करीब 215 अनुदानित कॉलेज हैं। वहीं 50 फीसदी से अधिक संस्थाएं विविध पाठ्यक्रमों के साथ एक से अधिक कॉलेज संचालित कर रही हैं।
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क्यों बन रही है नई नीति
राज्य में उच्च शिक्षण संस्थानों को अधिक स्वायत्तता देने और अनुदानित कॉलेजों को निजी विश्वविद्यालयों में परिवर्तित करने की मांग लगातार उठ रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने शैक्षणिक, तकनीकी, आर्थिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर समग्र नीति तैयार करने का निर्णय लिया है।
समिति के सामने अहम जिम्मेदारियां
- कॉलेजों को विश्वविद्यालय में बदलने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक गुणवत्ता, बुनियादी ढांचा और रिसर्च मानक तय करना।
- सरकारी जमीन मिलने की स्थित्ति में जमीन उपयोग की नीति स्पष्ट करना।
- रूपांतरण के बाद वेतन, भते और कर्मचारियों के भविष्य निधि।
- (पीएफ) से जुड़े नियम तय करना।
- शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की सहमति और अविकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- आरक्षण नीति और फीस नियंत्रण को लेकर दिशा-निर्देश देना।
- मौजूदा कर्मचारियों की सेवा शर्तें, वरिष्ठता और अधिकार सुरक्षित रखना।
- संबंधित कानूनों का अध्ययन कर नीति का प्रारूप तैयार करना।
एनईपी 2020 से जुड़ा बड़ा बदलाव
यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के अनुरूप मानी जा रही है। नीति के अनुसार वर्ष 2040 तक सभी उच्चा शिक्षण संस्थानों को बहुविषयक विश्वविद्यालय या हिग्री प्रदान करने वाले संस्थानों में बदलना है।
वर्ष 2030 तक हर जिले में कम से कम एक प्रमुख उच्च शिक्षण संस्थान स्थापित करने का लक्ष्य है। उच्च शिक्षण संस्थानों को रिसर्च यूनिवर्सिटी, टीचिंग यूनिवर्सिटी और स्वायत डिग्री कॉलेज के रूप में वर्गीकृत करने की योजना है।
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अनुदानित महाविद्यालयों को वर्तमान में जो सुविधाएं मिल रही है, वह अबाधित रहना चाहिए, साथ ही नियमों में स्पष्टता आवश्यक है। इससे यूनिवर्सिटी बनने वाले कॉलेजों की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी, गुणवत्ता को बनाएं रखना के लिए विशेष प्रयास करने होंगे, जिन संस्थाओं के पास एक से अधिक कॉलेज है, उनके लिए प्राइवेट यूनिवर्सिटी में तब्दील होने की च्वाइस रहेगी।
– डॉ. बचनराव तायवाडे, वरिष्ठ प्राधिकरण सदस्य
यह पहल उच्च शिक्षा के प्राइवेटाइजेशन की और है कदम है। इससे शिक्षा संस्थाओं की जिम्मेदारी बढ़ जाएगी। विश्वविद्यालयों पर निर्भरता कम होगी, सभी को अपनी गुणवत्ता को बनाए रखने के लिए सतत रूप से प्रवास करते रहना होगा। यह कदम नई शिक्षा नीति के तहत उठाया गया है। भविष्य में और भी बदलाव की उम्मीद है।
– डॉ. नितिन कौगरे, सचिव, नूटा
-नवभारत लाइव के लिए नागपुर से दिनेश टेकाड़े की रिपोर्ट
