सुनील केदार की मनमानी से तंग कांग्रेस, कर दी बगावत! पूरी काटोल कमेटी ने दिया सामूहिक इस्तीफा
Sunil Kedar Controversy: कोंढाली नगर पंचायत चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस में बगावत। सुनील केदार पर मनमानी के आरोप, काटोल तहसील कांग्रेस कमेटी ने सामूहिक इस्तीफे का ऐलान किया।
- Written By: प्रिया जैस
कमेटी ने दिया इस्तीफा (सौजन्य-नवभारत)
Katol Congress Resignation: कोंढाली नगर पंचायत चुनाव के पहले ही कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। काटोल तहसील कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सतीश चव्हाण ने पूर्व विधायक सुनील केदार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने नगरपंचायत चुनाव में काटोल तहसील कांग्रेस कमेटी को विश्वास में लिए बिना ही नगराध्यक्ष और नगरसेवक पदों के उम्मीदवार घोषित किए।
जिससे भाजपा को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। इस मनमानी के विरोध में काटोल तहसील कांग्रेस कमेटी ने सामूहिक इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। कोंढाली मेन रोड स्थित तहसील कांग्रेस कार्यालय में आयोजित पत्र परिषद में अध्यक्ष सतीश चव्हाण, पूर्व तहसील अध्यक्ष राष्ट्रपाल पाटिल, कोंढाली शहर कांग्रेस अध्यक्ष रमन ठाकरे, पूर्व पंचायत समिति सदस्य अरुण उईके, रणजीत गवाड सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
अनिल देशमुख के साथ गठबंधन
पदाधिकारियों ने बताया कि काटोल–कोंढाली क्षेत्र में कांग्रेस पिछले 20 वर्षों से निरंतर काम कर रही है। नगरपंचायत चुनाव को लेकर तहसील कांग्रेस कमेटी की राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के नेता एवं पूर्व मंत्री अनिल देशमुख के साथ गठबंधन की चर्चा भी चल रही थी, जिसकी जानकारी नागपुर जिला कांग्रेस कमेटी को दे दी गई थी।
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निर्दलीय नामांकन भरा
लेकिन नामांकन के अंतिम दिन, पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता केदार ने न तो बैठक बुलाई, न ही तहसील कांग्रेस को विश्वास में लिया। इसके बावजूद उन्होंने कोंढाली नगराध्यक्ष और नगरसेवक पदों के लिए अपने स्तर पर उम्मीदवारों के नामांकन करवा दिए। आरोप यह भी लगाया गया कि अंतिम समय पर राष्ट्रवादी कांग्रेस से आए उम्मीदवारों को बी-फॉर्म जारी किए गए, जबकि कोंढाली कांग्रेस के नगराध्यक्ष रमन ठाकरे को बी-फॉर्म नहीं दिया गया, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन भरना पड़ा।
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तहसील कांग्रेस पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उन्हें कोंढाली में कांग्रेस के चुनाव लड़ने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन 20 वर्षों से संगठन को मजबूत करने वाले निष्ठावान स्थानीय कार्यकर्ताओ को दरकिनार कर भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया यह खेल केदार की खुली मनमानी है। इसी के विरोध में काटोल तहसील कांग्रेस कमेटी ने यह मुद्दा वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं तक पहुंचाने और सामूहिक इस्तीफा देने की घोषणा की है।
