

Bhandara Traffic Police: बढ़ती महंगाई और स्कूलों की भारी-भरकम फीस के बीच अब अभिभावकों के सामने बच्चों के सुरक्षित आवागमन की भी बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। स्कूल बसों की कमी और निजी बसों के बढ़े हुए किराए के कारण अधिकांश अभिभावक अपने बच्चों को ऑटो रिक्शा और वैन से स्कूल भेजने को मजबूर हैं। लेकिन अधिक मुनाफा कमाने की लालच में वाहन चालक क्षमता से कई गुना अधिक बच्चों को बैठाकर उनकी जान जोखिम में डाल रहे हैं।
इसे देखते हुए जिला यातायात पुलिस ने विशेष अभियान चलाकर पिछले एक महीने में 55 वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की है। क्षमता से चार गुना अधिक बच्चों का परिवहन : यातायात नियमों के अनुसार ऑटो रिक्शा और वैन में निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाना प्रतिबंधित है। इसके बावजूद शहर के प्रमुख स्कूलों के बाहर ऑटो और वैन में 10 से 15 बच्चों को ठूंस-ठूंसकर ले जाया जा रहा है। बच्चों के भारी बस्तों और अधिक संख्या के कारण दुर्घटना का खतरा लगातार बना रहता है। समय पर स्कूल पहुंचाने की जल्दबाजी में कई चालक तेज गति से वाहन चलाते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाती है।
स्कूली बच्चों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने विभिन्न सुरक्षा नियम लागू किए हैं। जिला यातायात शाखा ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के - लिए स्कूलों और वाहन चालकों को सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद कई चालक अधिक कमाई के लिए क्षमता से ज्यादा बच्चों को बैठा रहे हैं। कई मामलों में चालक की सीट के पास भी बच्चों को बैठा दिया जाता है, जिससे वाहन नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है। जगह की कमी
के कारण बच्चों के स्कूल बैग वाहन के बाहर लटकाए जाते हैं, जो गंभीर हादसे का कारण बन सकते हैं।
केवल शहर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों की स्थिति भी चिंताजनक है। लंबी दूरी, संकरी सड़कें और वाहनों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे घंटों तक ठसाठस भरे ऑटो रिक्शा में सफर करने को मजबूर हैं। बरसात के मौसम में यह समस्या और भी गंभीर हो जाती है।
जिला यातायात शाखा ने स्कूलों और वाहन चालकों को निर्देश दिए हैं कि सभी स्कूल वाहनों के पास फिटनेस प्रमाणपत्र, बीमा, पीयूसी और व्यावसायिक परमिट अनिवार्य रूप से होना चाहिए। चालक के पास भारी वाहन अथवा कम से कम पांच वर्ष पुराना व्यावसायिक ड्राइविंग लाइसेंस होना आवश्यक है। स्कूल बस का रंग पीला होना चाहिए तथा उस पर "स्कूल बस और पीछे ऑन स्कूल ड्यूटी" स्पष्ट रूप से लिखा होना चाहिए, वाहन में 40 किमी प्रति घंटा की गति सीमा, फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशामक यंत्र और खिड़कियां पर सुरक्षा ग्रिल अनिवार्य हैं।
यदि वैन में छात्राएं सफर करती है तो महिला परिचारिका (लेडी अटेंडेट) की नियुक्ति भी आवश्यक है। प्रत्येक स्कूल को स्कूल परिवहन समिति गठित कर नियमों के उल्लंघन की जानकारी तत्काल पुलिस को देने के निर्देश दिए गए है।
अभिभावक विजय गायधने ने कहा कि, ऑटो और वैन में बच्चों को ठूसकर ले जाते देख डर लगता है, लेकिन स्कूल दूर होने और बस सुविधा नहीं होने से मजबूरी है। यदि आरटीओ और यातायात पुलिस नियमों का सख्ती से पालन कराए तो यह समस्या काफी हद तक दूर हो सकती है।
जिला यातायात शाखा के पुलिस निरीक्षक कृष्णा तिवारी ने कहा कि, स्कूली बच्चों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्कूल खुलने के बाद से ही हम विशेष अभियान चलाकर नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। अभिभावक भी अपने बच्चों को क्षमता से अधिक भरे वाहनों में भेजने से बचें। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।