Gas Black Marketing Nagpur Police (फोटो क्रेडिट-X)
Gas Black Marketing Nagpur Police: नागपुर के जरीपटका इलाके में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने एक गैस एजेंसी पर बड़ी छापेमारी की है। इस कार्रवाई के दौरान अवैध रूप से संग्रहित किए गए बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं। अधिकारियों को पुख्ता जानकारी मिली थी कि इन सिलेंडरों को नियमित उपभोक्ताओं को देने के बजाय ब्लैक मार्केट (कालाबाजारी) में ऊंचे दामों पर बेचने के उद्देश्य से छिपाकर रखा गया था। इस छापेमारी ने शहर में चल रहे गैस सिंडिकेट की पोल खोल दी है।
नागपुर के विभिन्न हिस्सों में पिछले कुछ समय से घरेलू गैस सिलेंडरों की किल्लत की शिकायतें मिल रही थीं। इसी बीच जरीपटका पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली एक गैस एजेंसी के बारे में गुप्त सूचना मिली कि वहां सिलेंडरों का अवैध स्टॉक जमा किया गया है। सूचना की पुष्टि होते ही प्रशासन ने जाल बिछाया और मौके पर पहुंचकर स्टॉक रजिस्टर और गोदाम की तलाशी ली, जहां दस्तावेजों और मौजूद सिलेंडरों की संख्या में भारी अंतर पाया गया।
खाद्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, एजेंसी संचालक उपभोक्ताओं को ‘स्टॉक खत्म’ होने का बहाना बनाकर गुमराह कर रहे थे, जबकि गोदाम के भीतर सिलेंडरों का अंबार लगा हुआ था। प्राथमिक जांच में यह संकेत मिले हैं कि इन सिलेंडरों को कमर्शियल उपयोग करने वालों या ब्लैक में जरूरतमंदों को महंगे दामों पर बेचने की योजना थी। जब्त किए गए सिलेंडरों की कुल संख्या और उनकी बाजार कीमत का आकलन किया जा रहा है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह गोरखधंधा कितने समय से चल रहा था।
ये भी पढ़ें- सांस लेना हुआ दूभर, पुणे के खराडी निवासियों ने मलबे के ढेर से निकलते जहरीले धुंए को लेकर जताई चिंता
यह छापेमारी ऐसे समय में हुई है जब आम नागरिक रसोई गैस की समय पर डिलीवरी न होने के कारण परेशान हैं। कई इलाकों में उपभोक्ताओं को हफ्तों तक रिफिल के लिए इंतजार करना पड़ता है। विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि गैस एजेंसियों को मिलने वाला कोटा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचना अनिवार्य है। यदि कोई एजेंसी संचालक कृत्रिम कमी (Artificial Scarcity) पैदा कर मुनाफाखोरी की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जरीपटका पुलिस ने इस मामले में संबंधित गैस एजेंसी के खिलाफ मामला दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग अब एजेंसी के पिछले छह महीनों के वितरण रिकॉर्ड और ऑनलाइन बुकिंग डेटा को खंगाल रहा है। यदि कालाबाजारी के आरोप पूरी तरह सिद्ध होते हैं, तो नागरी आपूर्ति विभाग इस एजेंसी का लाइसेंस रद्द करने की सिफारिश भी कर सकता है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई एजेंसी सिलेंडर के लिए अतिरिक्त पैसे मांगे या स्टॉक होने के बावजूद मना करे, तो तुरंत टोल-फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं।