रिश्वतखोरी मामले में हेड कांस्टेबल बरी, कोर्ट ने कहा- आरोप साबित नहीं हुए, ACB की कार्रवाई पर उठे सवाल!
Nagpur ACB Case: नागपुर में 20 हजार रुपये रिश्वत मांगने के मामले में हुड़केश्वर थाने के पूर्व हेड कांस्टेबल को विशेष अदालत ने साक्ष्यों में विसंगतियां मिलने पर दोषमुक्त कर दिया।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर हुड़केश्वर थाना हेड कांस्टेबल रिश्वत मामले में दोषमुक्त सांकेतिक फोटो (सोर्स-AI)
Former Constable Acquitted Bribery: नागपुर जिले में रिश्वतखोरी के एक चर्चित मामले में आरोपी हुड़केश्वर थाने के पूर्व हेड कांस्टेबल संजय गायधने को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विशेष अदालत ने दोषमुक्त कर दिया। विशेष न्यायाधीश एम.एस. गणोरकर ने सुनवाई के दौरान पाया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ रिश्वत मांगने और स्वीकार करने का आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं कर सका।
अभियोजन के अनुसार, शिकायतकर्ता की कार से एक दोपहिया वाहन की टक्कर होने के बाद उसके खिलाफ हुड़केश्वर थाने में मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि मामले को निपटाने के बदले तत्कालीन हेड कांस्टेबल संजय गायधने ने शिकायतकर्ता और उसके भाई से 20 हजार रुपये रिश्वत की मांग की।
शिकायत मिलने पर एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने दो पंच गवाहों की मौजूदगी में ट्रैप की कार्रवाई की। नोटों पर फिनॉल्फ्थेलीन पाउडर लगाया गया, डिजिटल वॉइस रिकॉर्डर से कथित मांग का सत्यापन किया गया और रिश्वत की राशि स्वीकार करने के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया गया।
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गवाहों के बयानों में मिले गंभीर विरोधाभास
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के अधिवक्ता प्रकाश नायडू ने अदालत में दलील दी कि रिश्वत मांगने के आरोप का सत्यापन विश्वसनीय नहीं है। उन्होंने बताया कि अभियोजन पक्ष के गवाहों के बयानों में रिश्वत की मांग, स्थान और पूरी घटना को लेकर कई गंभीर विरोधाभास हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, विशेषकर वॉइस रिकॉर्डिंग की प्रमाणिकता पर भी सवाल उठाए गए। बचाव पक्ष का कहना था कि रिकॉर्डिंग से छेड़छाड़ नहीं हुई, इसका कोई ठोस प्रमाण अभियोजन पेश नहीं कर सका।
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संदेह का लाभ मिला, सभी आरोपों से बरी
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद विशेष अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष रिश्वत मांगने और स्वीकार करने के आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। अदालत ने साक्ष्यों और गवाहों में मौजूद विसंगतियों को महत्वपूर्ण मानते हुए संजय गायधने को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया। इस मामले में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता मितेश बैस, होमेश चौहान, सुरभि नायडू (गोडबोले) और ध्रुव शर्मा ने भी सहयोग किया।
