बारिश-बाढ़ की मार: भंडारा में खरीफ खेती संकट में, कीट प्रकोप और मजदूरों की कमी से बढ़ी लागत
Bhandara Kharif Crops: अनियमित बारिश और बाढ़ से भंडारा में खरीफ खेती प्रभावित हुई। अब तक सिर्फ 69% क्षेत्र में बुआई हुई, जबकि फसल नुकसान, कीट प्रकोप और मजदूरों की कमी से किसान परेशान हैं।
- Written By: आलोक उमाकृष्ण
अनियमित बारिश से फसल बरबाद (सोर्स: AI)
Bhandara Kharif Crops Irregular Rain: भंडारा जिले में इस वर्ष मानसून की अनियमित चाल ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। मानसून की शुरुआत में लंबे समय तक पर्याप्त बारिश नहीं होने से खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित रही, वहीं जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुई तेज बारिश और अतिवृष्टि ने हालात और खराब कर दिए।
जिले में खरीफ फसलों का कुल सामान्य रकबा 1 लाख 87 हजार 379 हेक्टेयर है, लेकिन अब तक केवल 1 लाख 29 हजार 583 हेक्टेयर यानी 69 प्रतिशत क्षेत्र में ही बुआई और रोपाई पूरी हो सकी है। बारिश थमने के बाद तेज धूप और उमस के कारण फसलों में कीट एवं रोगों का खतरा बढ़ गया है। किसानों को फसलों को बचाने के लिए अतिरिक्त खर्च कर कीटनाशकों का छिड़काव और अन्य कृषि कार्य करने पड़ रहे हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है।
बाढ़ से फसल हुए तबाह
हाल की भारी बारिश और बाढ़ ने जिले के कई हिस्सों में खेती को भारी नुकसान पहुंचाया है। बाढ़ का पानी उतरने के बाद धान, कपास, सोयाबीन और मक्का की फसलों के खराब होने की तस्वीरें सामने आने लगी हैं। कई खेत तीन दिनों तक पानी में डूबे रहने से फसलों की जड़ें सड़ने लगी हैं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया है।
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इसी बीच अमरावती जिले में 30 जुलाई को हुई 75.8 मिमी औसत बारिश ने भी व्यापक तबाही मचाई। 40 राजस्व मंडलों में अतिवृष्टि दर्ज की गई, जबकि 21 मंडलों में 100 मिमी से अधिक वर्षा रिकॉर्ड हुई। बाढ़ के कारण एक युवक की मौत हो गई और कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।
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मजदूरों की कमी बढ़ी
बुआई, निराई और गुड़ाई जैसे कृषि कार्य एक साथ आने से ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि मजदूरों की भारी कमी हो गई है। मजदूरी दर बढ़ने और समय पर श्रमिक नहीं मिलने से किसानों पर आर्थिक बोझ और बढ़ गया है। कई गांवों में किसान अपने परिवार के सदस्यों के साथ खेतों में काम करने को मजबूर हैं।
किसान मंगेश उके का कहना है कि पहले ही अनियमित बारिश और फसल नुकसान से आर्थिक संकट गहरा गया था, अब महंगी मजदूरी और अतिरिक्त कृषि खर्च ने स्थिति और कठिन बना दी है। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मौसम अनुकूल रहेगा, ताकि बची हुई फसलों को सुरक्षित रखा जा सके और खरीफ सीजन में होने वाले नुकसान की भरपाई हो सके।
