नागपुर : पेंशन खैरात नहीं, संवैधानिक अधिकार है: रिटायर्ड कर्मचारी को राहत, हाई कोर्ट ने मनपा को लगाई फटकार
Nagpur Municipal Corporation: नागपुर हाई कोर्ट ने कहा कि पेंशन कर्मचारी का संवैधानिक अधिकार है। विभागीय जांच के बिना सेवानिवृत्त कर्मचारी के पेंशन लाभ रोकना उचित नहीं माना जा सकता।
- Written By: अंकिता पटेल
हाई कोर्ट, पेंशन अधिकार, जाति प्रमाणपत्र, (सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur High Court Judgment Pension Property Right: नागपुर याचिकाकर्ता संजय गौतम को 19 अक्टूबर 1991 को मनपा में घुमंतू जनजाति (NT) के लिए आरक्षित रिक्ति पर ‘वायरमैन’ के पद पर नियुक्त किया गया था। उनकी यह नियुक्ति 1979 में कार्यकारी मजिस्ट्रेट द्वारा जारी किए गए जाति प्रमाणपत्र के आधार पर हुई थी। लगभग 32 साल की लंबी सेवा के बाद 10 अगस्त 2022 को उनका जाति प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए जिला जाति प्रमाणपत्र जांच समिति को भेजा गया।
28 मार्च 2023 को जांच समिति ने उनके जाति दावे को अमान्य करार दिया। इसके बाद 31 मई 2024 को संजय गौतम अपनी सेवानिवृत्ति की आयु प्राप्त कर रिटायर हो गए। सेवानिवृत्ति के बाद मनपा ने उनकी पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, जीपीएफ आदि यह कहकर रोक दिए कि उनका जाति प्रमाणपत्र रद्द हो चुका है और मनपा ने इस संबंध में राज्य सरकार से मार्गदर्शन मांगा है।
इस पर संजय गौतम ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया जिस पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने फैसले में स्पष्ट किया है कि पेंशन कोई खैरात नहीं है बल्कि यह कर्मचारी की संपत्ति का अधिकार है जिसका स्रोत भारतीय संविधान के अनुच्छेद 300-A में निहित है। कोर्ट ने बिना किसी विभागीय जांच के पेंशन रोकने को अनुचित माना।
सम्बंधित ख़बरें
मनमाड: पुणे-इंदौर हाईवे पर अवैध अतिक्रमण पर चला जेसीबी, दुकानदारों ने खड़े किए तीखे सवाल
कम वर्षा के अनुमान से दोबारा बुआई का संकट, बीज और खाद की कमी से किसानों की बढ़ी चिंता
Kalyan Power Outage: कल्याण में 12 घंटे ब्लैकआउट से हाहाकार, बिजली पोल गिरने से ठप रही सप्लाई
Mumbai Water Crisis: मुंबई की सबसे बड़ी अपर वैतरणा झील में बचा ‘शून्य’ प्रतिशत पानी; मंडराया गंभीर जल संकट
राज्य सरकार के दिशा निर्देशों का इंतजार
मनपा के वकील ने 2000 के अधिनियम (Act of 2000) की धारा 10 का हवाला देते हुए कहा कि झूठे जाति प्रमाणपत्र के आधार पर हासिल किए गए लाभ वापस लिए जाने चाहिए। मनपा ने यह भी कहा कि उन्होंने पेंशन देने से इनकार नहीं किया है बल्कि राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के इंतजार में इसे रोक रखा है जिसके बाद हाई कोर्ट ने मनपा की कार्रवाई को गलत ठहराया।
यह भी पढ़ें:-नागपुर में 11 EV चार्जिंग स्टेशन तैयार, ई-वाहन चालकों को बड़ी राहत; प्रदूषण घटाने की दिशा में पहल
कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि 28 मार्च 2023 को जाति दावा अमान्य होने के बाद भी मनपा ने कर्मचारी को 14 महीने तक काम करने दिया और 31 मई 2024 को सामान्य रूप से रिटायर होने दिया।
