

Nagpur Rural Employment Scheme: नागपुर हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के तहत कथित रूप से लाखों रुपये का गबन करने के आरोप में फंसे ग्राम सेवक, तकनीकी सहायक और खेत मालिकों को बड़ी राहत दी है। न्या। प्रवीण पाटिल ने सभी आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं मंजूर कर लीं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार योजना के तहत किए गए एक बड़े फर्जीवाड़े के अनुसार कथित आरोपियों ने एक ही पानी के कुएं पर 2 बार काम होना दिखाकर सरकारी योजना का गलत लाभ उठाया और 3,77,911 रुपये के सरकारी धन का गबन किया।
जांच अधिकारी के मुताबिक 2 अलग-अलग सर्वे नंबरों में वास्तव में केवल एक ही कुआं मौजूद था लेकिन आरोपियों ने मिलीभगत करके सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर किया और धोखाधड़ी को अंजाम दिया। इसके बाद प्रशांत शामराव वानखेड़े, तुलसीराम रामकृष्ण दातारकर, रामकृष्ण नत्थू दातारकर और पवन यशवंत दातारकर के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
आरोपियों की पैरवी कर रहे वकील ने अदालत में दलील दी कि उन्हें इस मामले में गलत तरीके से फंसाया गया है। अपने बचाव में उन्होंने राजस्व अधिकारी द्वारा 16 फरवरी 2026 को खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) को लिखे गए एक पत्र का हवाला दिया।
इस पत्र में खुद राजस्व अधिकारी ने स्वीकार किया था कि वे यह स्पष्ट नहीं बता सकते कि सर्वे नंबर 290 वाले खेत में कथित कुआं असल
में कहां स्थित है। इसके अलावा, अदालत के संज्ञान में यह भी लाया गया कि जांच अधिकारी ने एक आरोपी (रामकृष्ण नत्थू दातारकर) को नोटिस जारी कर कहा था कि वे उसे गिरफ्तार नहीं करना चाहते हैं और उसे केवल चार्जशीट दायर होने के समय उपस्थित रहना होगा।
अदालत ने सभी आवेदकों को गिरफ्तारी की स्थिति में 25,000 रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पेश करने पर रिहा करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही जांच अधिकारी द्वारा बुलाए जाने पर आरोपियों को संबंधित पुलिस स्टेशन में उपस्थित होना होगा और जांच में पूरा सहयोग करने
आरोपियों को जांच अधिकारी और अदालत को अपना स्थायी पता और टेलीफोन/मोबाइल नंबर देना होगा और केस के अंतिम निपटारे तक इसे नहीं बदलने, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मामले के तथ्यों से परिचित किसी भी गवाह को कोई प्रलोभन, धमकी या वादा नहीं देने के आदेश दिए।
अदालत ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि इनमें से किसी भी शर्त का उल्लंघन होता है तो निचली अदालत दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह जमानत रद्द करने के लिए स्वतंत्र होगी।
सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी ने ग्राम पंचायत और संबंधित कार्यालयों से मामले से जुड़े सभी आवश्यक दस्तावेज पहले ही एकत्र कर लिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि पूरा मामला पूरी तरह से दस्तावेजी सबूतों पर आधारित है, इसलिए इस स्थिति में आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ करने की कोई आवश्यकता नहीं है। सरकारी वकील भी यह साबित करने में विफल रहे कि आरोपियों के न्याय से भागने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या गवाहों को प्रभावित करने की कोई आशंका है।