नागपुर HC की सख्त टिप्पणी: अंतरिम राहत मिलने के बाद लापरवाही मंजूर नहीं; याचिकाकर्ता पर लगाया जुर्माना
Nagpur High Court Fines: नागपुर हाई कोर्ट ने बैंक की संपत्ति कब्जा कार्रवाई के मामले में न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही बरतने पर याचिकाकर्ता कंपनी पर 1,000 रुपये का जुर्माना लगाया और सख्त टिप्पणी की।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर हाई कोर्ट, बैंक कब्जा कार्रवाई,प्रतीकात्मक तस्वीर (सोर्स: AI फोटो
Nagpur High Court Bank Property Possession: नागपुर जिले में सम्पत्ति पर कब्जा लेने की बैंक द्वारा की जा रही कार्रवाई को चुनौती देते हुए सेवल हार्स सेल्स कॉर्पोरेशन की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई। याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान कर बैंक द्वारा की जा रही कार्रवाई पर रोक लगा दी थी किंतु अब न्यायिक प्रक्रियाओं में लापरवाही बरतने के लिए न्यायाधीश अनिल किलोर और न्यायाधीश राज वाकोडे ने याचिकाकर्ता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 1 हजार रुपये का जुर्माना लगा दिया।
अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि किसी वादी को अदालत से कोई अंतरिम सुरक्षा मिल जाती है, तो यह उसका कर्तव्य है कि वह मामले में बिना किसी देरी के तत्परता से काम करे।
याचिका की प्रतियां नहीं की जमा
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि 25 जून 2026 को अदालत ने याचिकाकर्ता को अंतरिम राहत प्रदान की थी और सामान्य तथा निजी माध्यमों से प्रतिवादियों को नोटिस तामील करने का निर्देश दिया था लेकिन कार्यालय के रिकॉर्ड से पता चला कि याचिकाकर्ता ने अदालत के माध्यम से प्रतिवादियों को नोटिस भेजने के लिए आवश्यक प्रतियां ही जमा नहीं की थीं।
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अदालत ने याचिकाकर्ता के इस ढुलमुल रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एक बार जब के है और अदालत ऐसी राहत दे देती है, तो यह हर वादी का कर्तव्य है कि वह प्रतिवादियों को नोटिस तामील करने के लिए तत्परता से कार्य करे।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि आदेश के अनुपालन में ऐसी कोई भी चूक याचिकाकर्ता की गलत मंशा पर संदेह पैदा कर सकती है। भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए अदालत ने याचिकाकर्ता की इस चूक पर जुर्माना लगाना उचित समझा।
डीआरटी ने खारिज किया आवेदन
- याचिकाकर्ता मूल मकान मालिकों के यहां एक किरायेदार है। किरायेदारी की अवधि के दौरान ही मूल मकान मालिकों ने इस संपत्ति को अन्य लोगों को बेच दिया था।
- महत्वपूर्ण बात यह कि इस सेल डीड में भी याचिकाकर्ता का नाम बतौर किरायेदार स्पष्ट रूप से दर्ज था। इसके बावजूद नए खरीदारों ने इस संपत्ति को आईडीबीआई बैंक के पास गिरवी रख दिया। जब नए मालिकों का कर्ज खाता एनपीए संपत्ति घोषित हो गया, तो बैंक ने सरफेसी अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू कर दी। बैंक ने सरफेसी एक्ट की धारा 14 के तहत आदेश प्राप्त कर लिया और संपत्ति का भौतिक कब्जा लेने का नोटिस जारी कर दिया।
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- इस बेदखली के खिलाफ याचिकाकर्ता ने कर्ज वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) में धारा 17 के तहत आवेदन किया। बेदखली की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने के लिए एक अंतरिम आवेदन भी दायर किया गया, लेकिन डीआरटी ने 24 जून 2026 को उसे खारिज कर दिया।
