Mumbai News: विधिसंघर्षित बालकों के पुनर्वास हेतु ‘हेल्प डेस्क’, अज़ीम प्रेमजी के प्रस्ताव को CM फडणवीस ने दी मंज़ूरी
विधिसंघर्षित बालकों के पुनर्वास के लिए कानूनी, सामाजिक व परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु राज्य के निरीक्षणगृहों (Observation Homes) में हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएंगे।
- Written By: आंचल लोखंडे
विधिसंघर्षित बालकों के पुनर्वास हेतु 'हेल्प डेस्क'। (सौजन्यः सोशल मीडिया)
मुंबई: विधिसंघर्षित बालकों के पुनर्वास के लिए कानूनी, सामाजिक व परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराने हेतु राज्य के निरीक्षणगृहों यानी Observation Homes में हेल्प डेस्क स्थापित किए जाएंगे। यह प्रस्ताव समाजसेवी उद्योगपति अज़ीम प्रेमजी द्वारा दिया गया था, जिसे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्वीकृति दी है। ये हेल्प डेस्क सामाजिक संस्थाओं के माध्यम से संचालित किए जाएंगे।
CCL बच्चों के पुनर्वास के उद्देश्य से टाटा सामाजिक विज्ञान संस्थान (TISS), किशोर न्याय संसाधन केंद्र (RCJJ), और महिला व बाल विकास विभाग, महाराष्ट्र सरकार के बीच एक ऐतिहासिक समझौता किया जाएगा।
मानवाधिकार और सतत मानवी विकास के लिए अज़ीम प्रेमजी के प्रस्ताव को
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यह हेल्प डेस्क विधिसंघर्षित बालकों को सम्मान और सहानुभूति के साथ देखने का एक प्रयास है। इन बच्चों की सामाजिक और कानूनी समस्याओं को सुनने और मदद पहुंचाने का यह एक सशक्त माध्यम होगा। इससे कम उम्र में ही उचित मार्गदर्शन देकर उन्हें समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनाने की दिशा में राज्य सरकार का यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
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पुनर्वास और समाज में पुनः एकीकरण को बल
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि विधिसंघर्षित बच्चों से जुड़े मुद्दे केवल मानवाधिकारों के नहीं, बल्कि सतत मानवी विकास के भी गंभीर विषय हैं। इन बच्चों का पुनर्वास करना महाराष्ट्र सरकार की एक महत्वपूर्ण और नैतिक जिम्मेदारी है। हेल्प डेस्क की स्थापना के बाद कानूनी प्रक्रिया को बेहतर समझा जा सकेगा, बच्चों के शोषण व गलतफहमियों में कमी आएगी, न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा, जिससे पुनर्वास और समाज में पुनः एकीकरण को बल मिलेगा।
समुपदेशन के लिए हेल्प डेस्क की मदद
अक्सर ये बच्चे गरीब और कमजोर वर्ग से होते हैं, जिनके पास कानूनी जानकारी नहीं होती। कई बार वकीलों से मिली गलत सलाह, सामाजिक कलंक और भावनात्मक आघात के कारण न्यायिक प्रक्रिया में बाधाएं आती हैं। माता-पिता भी अक्सर कानूनी प्रक्रिया से अनभिज्ञ होते हैं। ऐसे में नशे से दूर रखने और समुपदेशन के लिए हेल्प डेस्क की मदद ली जाएगी। इसके अंतर्गत CCL बच्चों और उनके अभिभावकों को उनके अधिकारों और न्यायिक प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी, बाल न्याय बोर्ड, वकील, CWC व अन्य संबंधित संस्थाओं से समन्वय किया जाएगा, और प्रशिक्षित स्वयंसेवकों द्वारा निरंतर सेवा प्रदान की जाएगी।
यह योजना पहले चरण में नागपुर, यवतमाल, लातूर, पुणे और ठाणे इन पाँच जिलों में लागू की जाएगी, जहाँ हर वर्ष कम से कम 4,000 बच्चों तक पहुँचने का लक्ष्य है। इसके बाद इसे राज्य के प्रत्येक जिले में विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं (NGOs) के सहयोग से विस्तारित किया जाएगा।
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हेल्प डेस्क के अंतर्गत दी जाने वाली प्रमुख सेवाएं:
- किशोरों और उनके पालकों को किशोर न्याय प्रणाली की जानकारी और मार्गदर्शन
- कानूनी सहायता और पुनर्वास के लिए संदर्भ सेवा
- सामाजिक जांच रिपोर्ट तैयार करना और प्रस्तुत करना
- शिक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण, नशामुक्ति और फॉलोअप सेवा
- 24 घंटे हेल्पलाइन सेवा
- बाल न्याय, बाल संरक्षण एवं अन्य संबंधित संस्थाओं से समन्वय और लंबित मामलों का निवारण
