एक या तीन मौतें? नागपुर जिले के गोरेवाड़ा सफारी में रहस्य ने बढ़ाई चिंता, आधिकारिक दावों पर उठे सवाल
Nagpur Gorewada Zoo: नागपुर के गोरेवाड़ा प्राणी उद्यान में तेंदुओं की मौत को लेकर विरोधाभासी दावों ने विवाद खड़ा कर दिया है। आधिकारिक आंकड़ों व अन्य जानकारी में अंतर से पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
गोरेवाड़ा प्राणी उद्यान, तेंदुआ सफारी,(सोर्स: सोशल मीडिया)
Nagpur Leopard Death: नागपुर जिले के बालासाहेब ठाकरे गोरेवाड़ा अंतरराष्ट्रीय प्राणी उद्यान एक बार फिर विवादों के घेरे में है। तेंदुआ सफारी में रविवार को हुई एक हिंसक घटना के बाद प्रबंधन के आधिकारिक दावों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
वन विभाग ने जहां एक तेंदुए की मौत और एक के घायल होने की पुष्टि की है, वहीं सूत्रों का दावा है कि इस संघर्ष में 3 तेंदुओं की मौत हुई है। इस विरोधाभास ने वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के बीच खलबली मचा दी है। 14 जून को सफारी क्षेत्र में नर तेंदुओं के बीच खूनी संघर्ष हुआ था।
गोरेवाड़ा सफारी में तेंदुओं की मौत पर सवाल
वन विभाग का प्राथमिक तर्क है कि बाहर के जंगल से आए एक तेंदुए के प्रवेश के कारण यह घटना हुई। हालांकि सवाल यह है कि यदि केवल एक तेंदुआ बाहर से आया था, तो इतनी बड़ी क्षति कैसे हुई? सूत्रों के अनुसार, इस संघर्ष में ‘राजा’, ‘लकी’ और ‘डायना’ नाम के 3 तेंदुओं की मौत हुई है।
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आधिकारिक रिपोर्ट में केवल एक मौत का जिक्र होने से घटना की पारदर्शिता पर संदेह जताया जा रहा है। उच्च सुरक्षा वाले इस प्राणी उद्यान में बाहर का तेंदुआ आखिर बाड़े के भीतर कैसे घुसा। यह सुरक्षा घेरे और निगरानी तंत्र की विफलता को दर्शाता है।
सुरक्षा व्यवस्था और पारदर्शिता पर उठे प्रश्न
आप्रशिक्षित स्टाफः घटना के बाद चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन में मुख्य रूप से संविदा (कंट्रैक्ट) कर्मचारियों का उपयोग किया गया। वन्यजीवों जैसे संवेदनशील मामले में आप्रशिक्षित लोगों का होना बड़ी चूक मानी जा रही है।
संदेहास्पद स्थितिः संघर्ष के बाद वह ‘अज्ञात तेंदुआ’ पूरी रात नाइट शेल्टर में रहा, लेकिन रविवार को हुई खोजबीन में वह नहीं मिला। अंततः सोमवार सुबह उसे नाइट शेल्टर से ही रेस्क्यू किया गया, जो प्रबंधन की ढिलाई को उजागर करता है।
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स्वतंत्र जांच की मांग: यदि 3 तेंदुओं की मौत का दावा सच है, तो प्रबंधन द्वारा सत्य छिपाने का प्रयास एक गंभीर मामला है। वन्यजीव विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच की मांग तेज कर दी है, क्या प्रशासन इस मामले की तह तक जाकर सच्चाई सामने लाएगा, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
