नागपुर मेडिकल में बड़ा खुलासा,आधे मरीजों को नहीं मिलती दवाई; ट्रक भर दवाइयां हुई एक्सपायर
Nagpur Medicine Shortage: नागपुर मेडिकल में दवाइयों की कमी के बीच ट्रक भर एक्सपायरी दवाइयों का खुलासा हुआ है। आधे से ज्यादा मरीजों को दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं।
- Written By: अंकिता पटेल
नागपुर मेडिकल दवा संकट,(सोर्स: सौजन्य AI)
Nagpur Medicine Shortage Government Hospital: नागपुर शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय व अस्पताल में दवाइयों की किल्लत कोई नई बात नहीं है। ओपीडी में आने वाले मरीजों में 50 फीसदी से अधिक को कोई भी दवाई नहीं मिलती। इसके बावजूद भारी मात्रा में दवाइयां एक्सपायरी होने की जानकारी सामने आई है। बताया जाता है कि करीब ट्रक भर दवाइयां एक्सपायरी होने के बाद स्टोर रूम में पड़ी हैं। वहीं ट्रक भर दवाइयों को करीब 6 महीने ठिकाने लगाया गया।
मेडिकल प्रशासन द्वारा दावा किया जाता है कि दवाइयों की कमी नहीं है लेकिन वास्तविकता इसके विपरीत बनी हुई है। अब भी ओपीडी में आने वाले 50 फीसदी से अधिक मरीजों को कोई भी दवाई नहीं मिलती। उन्हें बाहर से खरीदना पड़ता है। इसके बाद भी हर महीने भारी मात्रा में दवाइयां एक्सपायरी होने की जानकारी सामने आई है।
सबसे अधिक दवाइयां कोराना काल के वक्त की है। महामारी के दौरान सरकारी मेडिकल कॉलेजों को दवाइयों की आपूर्ति करने वाली कंपनी हाफकिन्स द्वारा भरपूर दवाइयां सामग्री उपलब्ध कराई गई थीं। इसके साथ ही अनेक सामाजिक संगठनों, एजेंसियों, सरकारी उपक्रमों ने भी मेडिकल को दवाइयां सहित सामग्री दान की थी। इनमें से कई दवाइयां बच गई। बाद में यह सभी दवाइयां एक्सपायरी हो गई।
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स्टोर रूम में जगह तक नहीं
दवाइयां बचने के बाद वैद्यकीय शिक्षा व अनुसंधान विभाग ने मई 2025 को आदेश जारी कर बची एक्सपायरी दवाइयों यानी बायो मेडिकल वेस्ट को ठिकाने लगाने के लिए संबंधित कंपनी को कहा। मेडिकल सहित नागपुर के सभी सरकारी अस्पतालों का बायो मेडिकल वेस्ट सुपर हाइजीन डिस्पोजल कंपनी द्वारा डिस्पोज किया जाता है।
कंपनी नियमित रूप से बायो मेडिकल वेस्ट भी मेडिकल से उठाती है, नवंबर 2025 में कंपनी ने करीब एक ट्रक एक्सपायरी दवाइयां डिस्पोज कीं। इनमें पीपी किट, मास्ट, सेनेटाइजर, कैल्सियम टेबलेट, एमिनो एसिड, लाइजोसेन इंजेक्शन, आर्टिसोनोट, आदि दवाइयों का समावेश रहा था। अब भी करीब इतनी ही दवाइयां पड़ी हुई है, स्टोर रूम का एक कमरा पूरा एक्सपायरी दवाइयों से भरा हुआ है।
इस वजह से नई दवाइया रखने तक की जगह नहीं है, स्टोर रूम में अब भी कई दवाइयां बाहर रखी है जी गर्मी की मार झेल रही है। वहीं बारिश के सीजन में यह दवाइयां भी खराब होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
रेमडेसिवर की थी किल्लत अब बेकार हो गई
बची हुई दवाइयों को डिस्पोज करने के लिए मेडिकल प्रशासन ने कंपनी को करीब 2 महीने पूर्व पत्र भेजा था लेकिन अब तक एक्सपायरी दवाइया नहीं उठाई गई है। इनमें रेनिटिन, लिंगनोथेन, डोपामाइन, एक्सिश्रीमायसिन, रेमडेसिवर जैसे इंजेक्शन का समावेश है। यह वही रेमडेसिवर इंजेक्शन है जो कोरोना के वक्त मिलना मुश्किल हो गया था।
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लोगों को अपनी जान बचाने और इंजेक्शन के लिए भटकना पड़ रहा था लेकिन अब यही इंजेक्शन मेडिकल में बेकार पड़े हुए थे। मेडिकल प्रशासन के पत्र के बाद भी अब तक कंपनी ने बायो मेडिकल वेस्ट नहीं उठाया है। बताया जाता है कि कंपनी का करीब 25 लाख रुपये से ज्यादा मेडिकल पर बकाया है। यह बकाया दिसंबर 2025 से होने की जानकारी सामने आई है। बकाया मिलने के बाद ही एक्सपायरी दवाइयों को डिस्पोज किया जा सकेगा।
