नवभारत संपादकीय: देश का सियासी नक्शा भगवा, बीजेपी का अधिकांश राज्यों में वर्चस्व

BJP Political Expansion: देश के अधिकांश राज्यों में बीजेपी या उसके गठबंधन की सरकार बनने से राजनीतिक परिदृश्य बदल गया है। बंगाल जीत के बाद पार्टी का प्रभाव और बढ़ गया है।
Navbharat Editorial: The Country's Political Map Turns Saffron; BJP Dominates in Most States
प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी,(सोर्स: सोशल मीडिया)
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BJP Dominance Indian Politics: देश का राजनीतिक मानचित्र भगवा हो गया है। देश के अधिकांश राज्यों में बीजेपी या उसके नेतृत्व वाले गठबंधन की सरकार है। हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ में उसकी सत्ता है। बिहार और ओडिशा के बाद बंगाल भी उसके कब्जे में चला गया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी को इस बात का दुख था कि भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ। श्यामाप्रसाद मुखर्जी के बंगाल में बीजेपी अब तक सफल क्यों नहीं हो पाई। उनकी यह मुराद प्रधानमंत्री मोदी ने पूरी कर दी।

आज की राजनीति में बीजेपी के अश्वमेध को रोकने की ताकत विपक्ष में नहीं है। कीर के पास केवल कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश जैसे 3 राज्य हैं। अब केरल में भी उसके नेतृत्व वाला मोर्चा यूडीएफ जीत गया है। आम आदमी पार्टी के पास केवल पंजाब रह गया है। बंगाल में बीजेपी की जीत का देश की राजनीति पर दूरगामी परिणाम हो सकता है।

उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव है जिसमें यदि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में पुनः बीजेपी ने जीत हासिल की तो सपा का संसद में दिखने वाला आक्रामक रवैया ठंडा पड़ सकता है। देश की राजनीति में लेफ्ट पूरी तरह प्रभावशून्य हो चुका है। त्रिपुरा व बंगाल में सफाया हो जाने के बाद अब केरल में भी पिनराई विजयन की वाम मोर्चा सरकार की विदाई हो गई।

बीजेपी की लोकप्रियता अपनी जगह है लेकिन उसने क्षेत्रीय पार्टियों की ताकत घटाकर अपना प्रभाव बढ़ाया है। विपक्षी नेताओं

पर केंद्रीय जांच एजेंसियों का दबाव बना रहने से उन्होंने या तो बीजेपी के सामने आत्मसमर्पण कर दिया अथवा राजनीतिक रूप से कमजोर होकर रह गए। यूपी में मायावती की बसपा गुमसुम होकर रह गई है। माहाराष्ट्र और बिहार में बीजेपी अपनी सरकार चलाने के लिए क्षेत्रीय दलों के सहयोग पर निर्भर है।

महाराष्ट्र में शिवसेना (शिंदे) व राकां (अजीत पवार) के साथ बीजेपी की महायुति सरकार है ती बिहार में वह जनता दल (यू) के सहयोग से सरकार चला रही है। विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' में सामर्थ्य नहीं है कि बीजेपी के विजयरथ को रोक सके। विपक्ष का बिखराव इसलिए भी देखा गया क्योंकि ममता और केजरीवाल कांग्रेस का नेतृत्व स्वीकार करने को राजी नहीं थे।

नीतीशकुमार व चंद्राबाबू नायडू ने 2024 में मोदी सरकार के गठन में सहयोग दिया। इंडिया गठजोड़ में शिवसेना (उद्धव) व राकां (शरद पवार) छोटी पार्टियां हैं। इतने पर भी कांग्रेस को उम्मीदें बरकरार हैं, क्योंकि 3 राज्यों में उसकी सरकार है और चौथे राज्य केरल में उसके नेतृत्व में सरकार बनने वाली है।

'आप' के कमजोर होने का फायदा कांग्रेस को ही मिलेगा। वास्तव में आम आदमी पार्टी ने ही कांग्रेस को गुजरात, दिल्ली व पंजाब में नुकसान पहुंचाया था। अब बीजेपी के मुकाबले ताकत बढ़ानी हो तो इंडिया गठबंधन को नए समीकरण बनाने पड़ेंगे। इस गठबंधन की असली ताकत कांग्रेस, टीएमसी, सपा व द्रमुक जैसी 4 पार्टियों में है।

लेख- चंद्रमोहन द्विवेदी के द्वारा

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