कचरा संकलन कंपनियों पर लगा जुर्माना, सैलरी में होगी कटौती, एग्रीमेंट पर उठे सवाल
Nagpur Garbage Collection: कचरा संकलन प्रक्रिया में इस साल नागपुर बुरी तरह से पिछड़ गया है। रैंकिंग के सामने आने के बाद से प्रशासन की नींद खुली है और अब सख्त कदम उठाए जा रहे है।
- Written By: प्रिया जैस
कचरा संकलन (सौजन्य-नवभारत)
Nagpur Garbage Collection: कचरा संकलन प्रक्रिया में सबसे कम अंक मिलने के कारण रैंकिंग पाने में मनपा को तो झटका लगा है किंतु कचरा संकलन के लिए नियुक्त की गई एजी एन्वायरो और बीवीजी कंपनियों की कार्यप्रणाली में सुधार होने का नाम नहीं ले रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दोनों कंपनियों के वाहनों की स्थिति और कार्य में कई तरह की खामियों के चलते मनपा की अतिरिक्त आयुक्त वसुमना पंत ने इन दोनों कंपनियों पर जुर्माना लगाने का आदेश जारी कर दिया।
इसके अनुसार इन दोनों कंपनियों के मासिक भुगतान में 10 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। उल्लेखनीय है कि कचरा संकलन में मनपा को केवल 31 प्रतिशत ही अंक प्राप्त हुए थे, जबकि इन दोनों कंपनियों को प्रति माह करोड़ों का भुगतान किया जा रहा है। हालांकि इन कंपनियों की नियुक्ति के कुछ समय बाद से ही इनकी कार्यप्रणाली पर स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा आपत्ति भी दर्ज कराई गई लेकिन प्रशासन ने कोई कड़ा रुख अपनाया जिसका खामियाजा कम अंक मिलने के कारण भुगतना पड़ा है।
कंपनियों को जारी किया नोटिस
एक ओर जहां अतिरिक्त आयुक्त की ओर से जुर्माना ठोकने का आदेश दिया गया वहीं दोनों कंपनियों को नोटिस भी जारी किया गया है। नोटिस के अनुसार इन कंपनियों को 24 घंटे के भीतर जवाब दायर करना होगा। बताया जाता है कि एजी एन्वायरो इन्फ्रा प्रा. लि. कंपनी को 1 से 5 नंबर के जोन तथा बीवीजी इंडिया को 6 से 10 नंबर के जोन की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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घरों से कचरा इकट्ठा करने के साथ ही परिवहन की जिम्मेदारी भी इन्हीं कंपनियों पर सौंपी गई है। कंपनियों के वाहनों का निरीक्षण करने पर वाहनों में कई तरह की खामियां पाई गई हैं। कई वाहनों पर नंबर प्लेट अच्छी स्थिति में नहीं है। यहां तक कि कुछ वाहन तो पंजीकृत भी नहीं हैं।
न वाहन पंजीकृत, न ही ड्राइवर के पास लाइसेंस
बताया जाता है कि निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां भी उजागर हुई हैं। आश्चर्यजनक यह रहा कि कई वाहन पंजीकृत ही नहीं थे, जबकि कुछ वाहनों में पीयूसी नहीं था। आलम यह है कि कई ड्राइवरों के पास वाहन चलाने का लाइसेंस तक नहीं था। कंपनियों के साथ किए गए एग्रीमेंट के अनुसार कचरा संकलन करने वाले वाहनों में गीला कचरा और सूखा कचरा जमा करने के लिए अलग-अलग डिब्बे आवश्यक हैं किंतु कई वाहनों में तो इस तरह के कम्पार्टमेंट ही नहीं थे।
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वाहनों की स्थिति को देखा जाए तो 70 प्रतिशत वाहन गंदगी भरे थे। बताया जाता है कि ये तमाम मामले एग्रीमेंट के अनुसार शर्तों का उल्लंघन हैं। बताया जाता है कि इन कंपनियों को कई बार एग्रीमेंट की शर्तों का पालन करने की हिदायतें दी गईं किंतु कंपनियों ने अधिकारियों के निर्देशों को भी हलके में लिया। यहीं कारण रहा कि वाहनों की स्थिति ज्यों की त्यों बनी है।
…तो रद्द क्यों नहीं करते एग्रीमेंट
स्थानीय जनप्रतिनिधियों का मानना है कि लंबे समय से दोनों कंपनियों की ओर से नियमों को ताक पर रखा गया है। सरकारी ठेके के नाम पर बिना पंजीकृत वाहनों को धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। यहां तक कि बिना लाइसेंस वाहन चलाए जाने के कारण कई बार घटनाएं तक हुई हैं जिसे लेकर लोगों ने प्रदर्शन भी किया किंतु कंपनियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती है। ऐसे में अब दोनों कंपनियों का एग्रीमेंट ही रद्द करने की मांग की जा रही है। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि इन कंपनियों के कारण ही मनपा की रैंकिंग में सुधार नहीं हो पाया है। इसे अधिकारियों ने गंभीरता से लेना चाहिए।
