वर्ल्ड चेस चैंपियन दिव्या देशमुख पहुंची नागपुर, बोली- माता-पिता का साथ सबसे अहम
Divya Deshmukh News: FIDE 2025 जीतकर इतिहास रचने वाली दिव्या देशमुख नागपुर पहुंची। इस जीत के बाद दिव्या ने कहा है कि माता-पिता को असफलता के समय अपने बच्चों का समर्थन करना चाहिए।
- Written By: आकाश मसने
नागपुर पहुंचने ने पर दिव्या का हुआ भव्य स्वागत (सोर्स: सोशल मीडिया)
Divya Deshmukh: भारत की 19 वर्षीय महिला शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने इतिहास रच दिया है। दिव्या ने फिडे महिला वर्ल्ड कप का खिताब जीतकर अपने करियर की सबसे बड़ी सफलता हासिल कर ली है। जीत के बाद नागपुर पहुंचने पर दिव्या का गुलाब के फूलों की बरसात और ढोल-ताशे से स्वागत किया गया। एयरपोर्ट से बाहर निकलीं दिव्या को देख शतरंज प्रेमी खुशी से झूम उठे।
स्वागत के लिए नन्हे बच्चों से लेकर बूढ़े तक पहुंचे। भविष्य में दिव्या की तरह बनने का सपना संजोए पहुंचे नन्हे बच्चों ने अपनी दिव्या दीदी को पास देखकर गर्मजोशी से हाथ हिलाकर स्वागत किया। फिडे महिला चेस वर्ल्ड कप (FIDE 2025) जीतकर इतिहास रचने वाली दिव्या देशमुख ने नागपुर में कहा कि माता-पिता को असफलता के समय अपने बच्चों का समर्थन करना चाहिए।
दिव्या देशमुख ने कहा कि फिडे 2025 में जीत हासिल करने के बाद मैं बहुत अच्छा महसूस कर रही हूं। मुझे यह विश्वास करने में समय लगा कि मैं जीत गई हूं। मेरा सफर आसान नहीं रहा है। इस यात्रा में बहुत लोगों का योगदान रहा है। अपनी सफलता का श्रेय मैं माता-पिता, परिवार और अपने पहले कोच राहुल जोशी को देना चाहूंगी।
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असफलता के समय माता-पिता को बच्चों का समर्थन करना चाहिए: दिव्या
दिव्या देशमुख ने कहा कि चेस बहुत ही जटिल खेल है। मुझे इसे पहचानने में समय लगा। अगर कोई इस खेल में रुचि रखता है, तो उनके माता-पिता को दिल से समर्थन करना चाहिए। खासकर, असफलता के समय माता-पिता को अपने बच्चों का समर्थन करना चाहिए। खेल जीवन का महत्वपूर्ण अंग है। यह हमें मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाता है। इसलिए खिलाड़ियों के लिए समर्थन जरूरी है।
कोनेरू हम्पी को हराकर जीता फिडे 2025 को खिताब
19 साल की दिव्या देशमुख ने फिडे महिला चेस वर्ल्ड कप (फिडे 2025) जीतकर इतिहास रचा। वह इस प्रतिष्ठित खिताब को जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। बाकू में हुए ऑल-इंडियन फाइनल में दिव्या ने कोनेरू हम्पी को रैपिड टाई-ब्रेक में 1.5–0.5 से हराकर खिताब जीता था। कोनेरू हम्पी एक दिग्गज खिलाड़ी हैं, लेकिन दिव्या ने फाइनल में उनकी चमक फीकी करते हुए खिताब अपने नाम किया।
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जीत के बाद दिव्या ने कहा था कि यह किस्मत का खेल था। टूर्नामेंट से पहले मैं सोच रही थी कि शायद ग्रैंडमास्टर नॉर्म हासिल कर लूं और फिर आखिरकार मैं ग्रैंडमास्टर बन गई।
पीएम मोदी ने दी बधाई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी दिव्या को उनकी ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए बधाई दी थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री ने लिखा था, “युवा दिव्या देशमुख के फिडे महिला विश्व शतरंज चैंपियन 2025 बनने पर गर्व है। इस उल्लेखनीय उपलब्धि के लिए उन्हें बधाई। यह जीत कई युवाओं को प्रेरित करेगी।”
