देवलापार में अवैध रेत परिवहन (सौजन्य-नवभारत)
Bavanthadi River Sand Smuggling: देवलापार उपविभाग के अंतर्गत लोधा गांव के पास बहने वाली बावनथडी नदी से बड़े पैमाने पर रेत परिवहन किया जा रहा है। प्रशासन द्वारा लोधा घाट से रॉयल्टी युक्त रेत परिवहन को मंजूरी दी गई है, ताकि इसका उपयोग निर्माण कार्यों में हो सके। लेकिन पिछले डेढ़ से दो महीनों में अधिकृत परिवहन के साथ-साथ बड़े पैमाने पर अवैध रेत परिवहन भी सामने आया है।
जानकारी के अनुसार, लोधा घाट से ट्रैक्टरों के जरिए रेत पिंडकापार, बेलदा और हिवरा मार्ग से विभिन्न गांवों तक पहुंचाई जा रही है। इसी बीच 27 मार्च को कई जगहों पर जंगल क्षेत्र में सड़क किनारे रेत फेंकी हुई पाई गई, जिससे अवैध गतिविधियों का खुलासा हुआ। कई ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर नंबर अंकित नहीं थे और अधिकांश चालकों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस भी नहीं पाए गए।
सूत्रों ने बताया कि कुछ लोग एक ही रॉयल्टी रसीद पर दो बार रेत परिवहन (डबल ट्रिप) कर रहे हैं, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान हो रहा है। देवलापार वन विभाग के पिंडकापार चेक पोस्ट पर 26 मार्च को हुई जांच में भी बड़ी संख्या में ऐसे ट्रैक्टर पाए गए जिनके चालक बिना लाइसेंस के वाहन चला रहे थे और ट्रॉलियों पर नंबर नहीं थे, जो अवैध परिवहन की पुष्टि करता है।
इसके अलावा, पिंडकापार और नवेगांव मार्ग पर कई स्थानों पर रेत फेंकी हुई मिली है। बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर पलटने की घटनाओं के बाद चालक कार्रवाई के डर से रेत वहीं छोड़कर फरार हो जाते हैं।
सूत्रों के अनुसार, इन हादसों का एक बड़ा कारण शराब पीकर वाहन चलाना है। लोधा घाट से करीब आधा किलोमीटर दूर बावली गांव में शराब की उपलब्धता के कारण चालक रेत भरने के दौरान ही शराब पी लेते हैं और नशे में तेज गति से वाहन चलाते हैं, जिससे नियंत्रण खोकर ट्रैक्टर पलट जाते हैं। रेत परिवहन के लिए उपयोग किया जा रहा मार्ग बेहद संकरा है, जहां एक समय में केवल एक वाहन ही गुजर सकता है। ऐसे में यदि सामने से कोई वाहन आ जाए तो गंभीर हादसे की आशंका बनी रहती है।
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पूरे मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। अधिकारियों द्वारा केवल कार्रवाई का आश्वासन दिया जा रहा है, जबकि वन विभाग के रिकॉर्ड में अवैध परिवहन के कई मामले दर्ज हैं।
अप्पर तहसीलदार पूनम कदम ने कहा कि कार्रवाई के लिए टीम भेजी जाती है, लेकिन मौके पर ऐसे मामले नहीं मिलते। हालांकि, स्थानीय स्तर पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। इस लापरवाही के चलते जहां सरकार को आर्थिक नुकसान हो रहा है, वहीं आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई है।